Tuesday, 18 September 2018

My story "The Carrot Thief" in August issue of Magic Pot
Meeku rabbit and Teetu porcupine were fast friends. They used to spend time and enjoy together. Meeku was fond of carrots and he had grown carrots all around his garden. One morning when Teetu went to meet Meeku, he found him sitting very sad in his garden. Teetu asked him, “Why are you looking so sad?”
Meeku pointed a finger towards corner of his garden, “Someone has stolen so many of my carrots.”
“Oh! Very bad. Who could have stolen the carrots?” Teetu was surprised.
“I worked very hard. It started with two but now someone has stolen ten carrots. I think I will lose all the carrots of my garden” Meeku was crying.
“You must lock the gate every night.” Teetu told Meeku.
“I lock the door every night but…” Meeku replied.
“I have an idea to help you.” Teetu told Meeku.
“Oh wow!” Meeku was feeling better.
Teetu told his idea to Meeku.
Both the friends planned for catching the thief. Late in the night when Meeku was sleeping, he heard someone crying loudly. He left his bedroom and came out and switched on the lights.
“You!!!!!!” Meeku was surprised when he saw his neighbour Cheeku crying in pain.
“I am sorry but will you please remove these quills. I did not expect that Teetu will be waiting for me at the gate.” Cheeku was weeping.
“Of course you should feel sorry about stealing Meeku’s carrots. Now you will have to face the punishment” Teetu was advising Cheeku.
“Yes…I am ready to face any punishment” Cheeku was feeling ashamed.
“You will have to help me in my gardening from tomorrow and of course you will enjoy carrot halwa with me every evening” Meeku patted Cheeku’s back.
Cheeku smiled and everyone burst out laughing.

Tuesday, 11 September 2018

राखी
"मम्मी, आप तो कह रही थी कि नई जगह पर मेरे बहुत सारे दोस्त बन जाएँगे पर अभी तक मेरा एक भी दोस्त नहीं बनाI" दीपा ने अपनी लाल रंग की गेंद उछालते हुए कहा
मम्मी दीपा की बात सुनकर मुस्कुरा दी ओर बोली-"अभी कुछ ही दिन ही तो हुए है हमें इस जगह पर आये हुए...
"मुझे पापा का ट्रांसफर होना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है मेरे सारे दोस्त छूट जाते हैI" दीपा दुखी होते हुए बोली
"पर नई जगह घूमने से तुम्हें हर बार कुछ नया सीखने को मिलता हैI तुम्हारे नए दोस्त बनते है और पुराने दोस्त भी भला कहीं टूटती है, तुम तो अपने दोस्तों से फोन पर बातें करती रहती होI"
पापा बोले-"दो दिन बाद तो राखी है इसलिए तुम्हारे स्कूल में भी छुट्टी होगीI हम उस दिन पूरा शहर घूमकर आएंगेI"
राखी का नाम आते ही दीपा का चेहरा उतर गया और वह अपनी गेंद पकड़े हुए बाहर बगीचे मेँ चली गई
मम्मी जानती थी कि दीपा का कोई भाई नहीं होने के कारण हर राखी पर वह बहुत उदास हो जाया करती थीI
बगीचे मेँ माली काका पौधों को पानी देते हुए किसी गाने की धुन गुनगुना रहे थेI
दीपा को उनका गाना बहुत अच्छा लगा और वह उनके पास जाकर खड़ी हो गईI
माली काका उसे देखकर मुस्कुरा उठे और बोले-"देखो, यह कितना सुन्दर नीम का पेड़ है ना...जब यह नन्हा सा पौधा था तब लगाया था मैंने इसे और आज देखो, कितना बड़ा पेड़ बन गया हैI"
दीपा ने सर उठाकर देखाI ठंडी बहती हवा के साथ साथ नीम का पेड़ भी मानों झूम रहा थाI
दीपा बोली-"हामरी टीचर बता रही थी कि नीम का पेड़ बहुत ऊंचाई तक जा सकता है और इसके पत्ते, तना, बीज और यहाँ तक कि इसके फूल भी बहुत फायदा करते हैI"
माली काका के पोपले मुँह पर हँसी तैर गई और वह प्रशंसा भरे स्वर मेँ बोले-"अरे, वाह तुम तो बहुत समझदार लड़की होI तुम्हें तो सब पता हैI"
अपनी तारीफ़ सुनकर दीपा बहुत खुश हो गई पर अभी भी वह राखी वाली बात पर दुखी थी इसलिए चुपचाप खड़ी रहीI
माली काका बोले-"क्या तुम्हें यहाँ आकर अच्छा नहीं लग रहा?"
दीपा सकपका गई जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई होI
वह नज़रें नीची करते हुए बोली-"मेरा कोई भाई नहीं है और हर राखी पर मुझे इस बात का बहुत दुःख होता हैI"
माली काका ने दीपा का चेहरा देखाI उसका रुआँसा चेहरा देखकर उनका मन भर आयाI
वह पानी के पाइप को क्यारी मेँ छोड़कर खड़े हो गए और दीपा के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोले-"भाई का काम होता है बहन की रक्षा करना और तुमने ही तो अभी अभी कहा कि नीम का पेड़ हर तरह से हमारे काम आता हैI तो तुम उसी को अपना भाई क्यों नहीं बना लेती?"
दीपा माली काका की बात सुनकर आश्चर्यचकित रह गई और बोली-"भला पेड़ को भी कोई भाई बनाता है क्या?"
माली काका बोले-"अगर नहीं बनाता है तो उसे बनाना चाहिएI प्रकृति को जब हम अपने परिवार का सदस्य समझेंगे तो हमें कभी भी प्राकृतिक आपदाओं का सामना नहीं करना पड़ेगाI"
दीपा ने नीम की पेड़ की ओर देखा जो अभी भी हवा के साथ साथ झूम रहा थाI
तब तक वहाँ पर दो आदमी आयेI उनमें से एक आदमी आगे बढ़ा और माली काका से बोला-"तुमसे कहा था कि होली पर इस नीम को पेड़ को काट लेने दो, पर तुम नहीं मानेI अब इस होली पर हम जबरदस्ती इस पेड़ को काट कर ले जाएंगे आखिर हमें होलिका दहन भी तो करना हैI"
माली काका उस सूट बूट पहने आदमी की बात सुनकर डर गए और कुछ नहीं बोल पाएI
दीपा ने माली काका की ओर देखा जो उसे इस समय बेहद असहाय और दुखी नज़र आ रहे थेI
वे दोनों लोग जैसे ही गेट खोलकर जाने लगे,दीपा पीछे से चिल्लाई -"अंकल एक मिनट रुकिएI"
वे दोनों आदमी गेट के पास ही रुक गएI
दीपा नीम के पेड़ के तने पर हाथ रखते हुए बोली-"अंकल, यह सिर्फ नीम का पेड़ नहीं हैI यह मेरा भाई है और शायद आपको नहीं पता नहीं कि हरा भरा पेड़ काटने पर पुलिस पकड़ कर ले जाती हैI"
दीपा की बात सुनकर वे दोनों सन्न रह गए और माली काका को गुस्से से देखते हुए, तुरंत कार मेँ बैठकर चल दिएI
उनके जाने के बाद दीपा ने माली काका को देखा जो गले मेँ पड़े गमछे से अपने ख़ुशी के आँसूँ पोंछ रहे थेI
दीपा उनके पास आकर बोली-"अब मुझे यह शहर बहुत अच्छा लग रहा है माली काका, और आप भी बहुत अच्छे होI"
यह कहने के बाद दीपा दौड़ती हुई नीम के पेड़ के पास गई और उसे सहलाते हुए बोली-"और मेरा यह भाई भी बहुत अच्छा हैI"
नीम का पेड़ ख़ुशी से नाच उठा और लहराती हुई शाखाओं से, हवा में उड़ते हुए सफ़ेद छोटे–छोटे फूल आकर दीपा के ऊपर गिर पड़ेI
दीपा मुस्कुरा उठी और साथ ही उसके मम्मी पापा भी जो खिड़की पर खड़े दीपा को देख रहे थेI
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(प्रकाशित)