आज भी इंटरवल के समय बच्चे जब खाना खाने के बाद
अपनी बोतलों का आधा पानी फेंककर स्कूल के वाटर कूलर से पानी भर रहे थे तो बारह साल
का राहुल पानी का दुरूपयोग देख कर बहुत दुखी हो रहा था I
रोज़ इंटरवल में ऐसा ही होता था I बच्चों
की बोतल का पानी दोपहर तक सुबह जितना ठंडा नहीं रहता था इसलिए वे बोतल का पानी
वाटर कूलर के पास ही फेंककर ठंडा पानी भर लेते थे I
राहुल जिस मोहल्ले से आता था वहाँ पर पानी की
हर दूसरे दिन किल्लत मची रहती थी और सब लोग पैसे मिलाकर वाटर टेंकर मँगवाते थे और एक-एक बाल्टी पानी के लिए लम्बी लाईन
लगती थी I
सबसे दुःख की बात ये थी कि टैंकर का पानी भी
बहुत गन्दा होता था , पर मजबूरीवश जैसे तैसे उसी पानी से काम चलाना पड़ता था इसलिए उसे छानकर और उसमें फ़िटकरी
डालकर सभी लोग उस पानी को स्वच्छ कर अपने उपयोग में लाते थे I
राहुल ने कई बार अपने दोस्तों को समझाने की
कोशिश करी पर वे उसे कंजूस कंजूस कहकर चिढ़ाने लगे I
एक दिन राहुल क्लास टीचर से जाकर बोला-"
सर, सभी छात्र अपनी बोतलों का पानी जमीन पर फेंक देते है जिससे पानी की
बहुत बर्बादी होती है I "
क्लास टीचर ने उसकी बात को समझा और कहा-"
ठीक है, मैं क्लास के बच्चों को समझाऊँगा I
उस दिन वर्मा सर ने पानी के महत्व के बारें में
बच्चों को समझाया जिससे कुछ बच्चों ने पानी फेंकना बंद कर दिया पर कुछ लापरवाह
बच्चों ने वर्मा सर की बातों की भी परवाह नहीं की I
वर्मा सर ने राहुल के कहने के बाद जब गौर करना
शुरू किया तो उन्हें भी पानी की इतनी बर्बादी देखकर बहुत दुःख हुआ I
उन्होंने राहुल के साथ मिलकर बच्चों को सुधारने
की एक और कोशिश करनी चाही I
राहुल ने वर्मा सर को एक आईडिया दिया जिससे
वर्मा सर की आँखें ख़ुशी से चमक उठी और उन्होंने राहुल को गले से लगा लिया I
दूसरे ही
दिन प्रिंसिपल सर से कहकर वर्मा सर ने वाटर कूलर के पास एक काले रंग का
बहुत बड़ा बर्तन रखवा दिया और बच्चों से पूछा -" क्या तुम्हें लगता नहीं है कि
ये बर्तन थोड़ा सा अजीब है I
सभी बच्चों ने तुरंत उस काले रंग के बर्तन को
देखा और उन्हें उसमें कई आकृतियाँ बनी दिखाई दी I
सर, इसमें तो सुनहरे रंग की एक परी बनी
है..एक बच्चा बोला
हाँ..इसमें तो चमकीले रंग की नीली नदी भी
है..दूसरा तपाक से आगे आकर बोला
बस फिर क्या था..बच्चे मस्ती के मूड में आ गए
और बहुत देर तक उस बर्तन के रंग, रूप
और उस पर बनी आकृतियों के बारें में बताने लगे
कोई बर्तन में मोर ढूंढ रहा था तो कोई उसमें से
खूंखार शेर को देख अचरज कर रहा था
थोड़ी देर बाद सबकी बात सुनने के बाद प्रिंसिपल
सर बोले-" अब मैं तुमको इस बर्तन की वो खासियत बताता हूँ , जो
तुममें से किसी को भी नहीं पता है
सभी बच्चों की आखें सर के चेहरे पर टिक गई और
थोड़ी देर पहले का कोलाहल बिलकुल शाँत हो गया
चारों और पिनड्रॉप साइलेंस हो गया था I बच्चें
दम साधे प्रिंसिपल सर के बोलने का इंतज़ार कर रहे थे
सर ने मुस्कुरा कर सभी बच्चों की तरफ देखा और
बोले-" जिससे मैंने ये बर्तन खरीदा हैं, उसने मुझे बताया
है कि ये बर्तन जादुई है I
जादुई..सभी बच्चों के मुंह से एक साथ निकला
हाँ..जादुई .. इस बर्तन में कितना भी पानी डाला
जाए , ये बर्तन कभी नहीं भरता I
सभी बच्चें आश्चर्य से एक दूसरे का मुँह देखने
लगे और असेंबली में खुसुर पुसुर शुरू हो गई
शाँत शाँत..प्रिंसिपल सर हँसते हुए बोले-"
अब कल से पूरा इस स्कूल जादू के इस खेल को खेलेगा ..जो पानी तुम लोग जमीन पर
फेंकते हो वो इस बर्तन में डालना और देखना कि ये बर्तन कभी भरेगा ही नहीं..
हाँ..हाँ..सर हम आज से ऐसा ही करेंगे ..कहते
हुए सभी बच्चों के चेहरों पर मुस्कान नाच रही थी
बस फिर क्या था सभी बच्चों के दिमाग में सिर्फ
वो जादुई बर्तन नाच रहा था और सब बेसब्री से इन्टरवल का रास्ता देख रहे थे I
इन्टरवल
होते ही सबने
जल्दी जल्दी अपना
खाना खत्म किया
और भागे वाटर कूलर
से अपनी -अपनी बोतलों में ठंडा पानी भरने के
लिए
पर आज तो जैसे
चमत्कार हो गया था I जहाँ
रोज पानी की नदी बन जाती थी और सबको शाम तक छप - छप करके चलना पड़ता था वहीँ
आज मैग्नीफाइंग ग्लास से भी अगर कोई देखता तो एक पानी की एक बूँद भी ज़मीन पर
नज़र नहीं
आती I
सभी बच्चे उस जादुई में अपनी बोतलों का पानी
डाल रहे थे कुछ शैतान बच्चे तो वाटर कूलर का पानी भी उस बर्तन में डाल रहे थे पर
सच में वो बर्तन जादुई था , क्योंकि इतना सारा पानी डालने के बाद
भी बर्तन खाली ही था I
इसी तरह से कई दिन बीत गए और बच्चे वार्षिक
परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त हो गए पर पानी वो अब भी नियम से उस जादुई बर्तन
में डालते और उसे कभी ना भरता देखकर दाँतों तले उँगलियाँ दबा लेते I
परीक्षाएँ शुरू होकर खत्म भी हो गई और बच्चे
उत्सुकता से रिज़ल्ट वाले दिन की प्रतीक्षा करने लगे I
जिस दिन रिज़ल्ट मिलना था उस दिन सभी बच्चों को
उनके मम्मी पापा के साथ स्कूल के पीछे खाली पड़े मैदान की तरफ़ भेजा गया I
सभी बच्चों के साथ साथ राहुल की क्लास के बच्चे
भी उस बंजर और सूखे मैदान की और जाने से बहुत गुस्सा हो रहे थे I
पर सिर्फ राहुल था जो वर्मा सर की तरफ देखकर
मुस्कुरा रहा था I
जैसे ही स्कूल के चौकीदार ने उस मैदान में जाने
वाला स्कूल के पीछे का दरवाज़ा खोला ,सबकी
आखें आश्चर्य से फ़टी रह गई I सभी को ऐसा लग रहा था मानों वे स्वर्ग
में आ गए हो I
जूही,मोगरा,गुलाब,चंपा,रजनीगंधा
और अनेक रंगबिरंगे फूलों का संसार जैसे उस मैदान में उत्तर आया था I हरी,पीली,नीली
गुलाबी और भी ना जाने कितने रंगों की तितलियाँ एक फूल से दूसरे फूल के ऊपर मंडरा
रही थी I सुगन्धित फूलों को छूकर आते ठंडी हवा के झोंके ,बच्चों
और उनके माता पिता को इस प्राकृतिक सुंदरता से अभिभूत करा रहे थे I तभी
वहां पर प्रिंसिपल सर आए और बोले-" इतनी सारी रंगबिरंगी तितलियाँ,हरे
भरे पेड़, चहचहाती चिड़िया और हज़ारों खूबसूरत फ़ूल मेरे इन प्रिया छात्रों के
कारण ही आज यहाँ पर अपनी सुंदरता बिखेर रहे है I
बच्चों के मुंह से आश्चर्य से निकला -"
हमारे कारण?
हाँ..याद है वो जादुई बर्तन..दरअसल तुम लोग
पानी की बहुत बर्बादी करते थे और बार बार
समझाने पर भी नहीं मानते थे ,इसलिए राहुल ने ही हमें एक सुझाव दिया
और आज नतीजा तुम्हारे सामने है
ये सुनते ही सब लोगो ने राहुल की तरफ देखा जो
एक ओर खड़ा मुस्कुरा रहा था I
सबकी आखों में हैरत के भाव देखते हुए प्रिंसिपल
सर मुस्कुराते हुए बोले-" दरअसल वो बर्तन जादुई नहीं था बल्कि राहुल के कहने
पर हमने उसमें एक छोटा सा छेद कर दिया था और एक नली लगा दी थी जिसका पानी सीधे इस
मैदान में आकर गिरता था I
इतवार वाले दिन राहुल खुद यहाँ आकर माली काका
के साथ उनकी बागवानी में मदद करता था और
आज देखो..इस जैसा सुन्दर बगीचा पूरे शहर में कहीं
नहीं है
सभी छात्रों की आखों से ख़ुशी के आँसूं बह निकले
I उनके माता पिता भी लज्जित थे जिन्होंने कभी बच्चों को पानी के महत्व
के बारे में नहीं बताया पर आज इन महकते फूलों ने जैसे उन सबकी सोच को एक नई दिशा
दे दी थी I सभी बच्चे और पैरेंट्स राहुल को बधाई दे रहे थे और मन ही मन प्रतिज्ञा
कर रहे थे कि अब वे कभी भी पानी को बर्बाद नहीं होने देंगे I
नंदन के फ़रवरी २०१६ अंक में प्रकाशित

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