Sunday, 12 June 2016

सुलतान और सुलेमान (बच्चों के लिए मेरी जादुई कहानी)

नहीं सुन पा रहा था लहरों के ऊँचे ऊँचे थपेड़ों को पत्थरों से टकराते हुए
और ना ही उसे अपने पैरों से बहते खून की जगह पर दर्द महसूस हो रहा था I
अस्त व्यस्त कपड़े  और फ़टी  हुई एक गठरी लिए वह चला जा रहा था I उसका हरा
रेशमी कुरता अब बदरंग और मटमैला  हो चुका था जो कि किसी समय बेहद खूबसूरत
रहा होगा क्योंकि उसकी जेब में  जड़े हुए नन्हें सितारे अभी भी सूरज की
मुस्कुराती किरणों से मिलकर हलकी सी मुस्कराहट बिखेर देते थे I
लाल चूड़ीदार तो अब लाल कम और नारंगी ज्यादा नज़र आने लगी थी I पर उसकी
आँखों का तेज और गोरे  चेहरे की आभा उसे कपड़ों से बिलकुल अलग सोचने पर
मजबूर कर देती थी I वो जब भी चलते हुए थक जाता तो अचानक रुकता और यहाँ
वहां झरना या नदी ढूंढकर पानी पीने से पहले जब अपना  चेहरा नदी में
देखता तो उसके चेहरे पर एक दर्द भरी हंसी तैर जाती I सुलतान, यही  नाम तो
था उसका, शक्ल   में भी और भाग्य में भी ...अंजीर देश का राजा  था वो, पर
एक दिन अजीब सी सनक सवार हुई उसके जैसे सात चेहरे पृथ्वी पर और भी हैं बस
जब उसे इसने सपने में देखा  तो उसे उन बाकी चेहरों से मिलने की उत्सुकता
बढ़ने  लगी I पहले तो उसने अपने ख़ास लोगो से पूछना शुरू किया जिसमे सबसे
अच्छा दोस्त था उसका नौकर सुलेमान Iये नाम भी सुलतान ने ही बचपन में  एक
दिन उसे सुलतान ने एक दिन  ये नाम खेल खेल में ही देते हुए कहा था कि
जैसे जैसे हम बड़े होंगे हमारी दोस्ती और भी  गहरी होगी
दोस्ती और गहरी होगी और ये सुनकर नन्हा सुलेमान बहुत हंसा था शायद ये
सोचकर कि भला राजा  और नौकर का क्या मेल I पर वो कुछ नहीं बोला  और गौर
से सुलतान की आँखों के जलते हुए उन नन्हे जुगनुओं को देखता रहा जिनमें
डूबकर वो बस एक सच्चा दोस्त पा लेना चाहता था ,जो हीरे मोती और झूठ की
दुनियां के साए से बहुत अलग हो  और सुलतान ने अपना वादा निभाया था  I
हर कदम पे आती मुश्किलों की काट वो खुद ही ढूंढ लेता और सुलेमान को अपने
प्यार और दोस्ती  के दुशाले के अन्दर हलकी गर्मी देता हुआ बाहर  की सर्द
हवाओं और बर्फ के नन्हे नुकीले टुकड़ों से हमेशा महफूज़ रखता I तो जिस दिन
सुलतान को पता चला कि उसकी शक्ल के सात आदमी और हैं तो उसने सुलेमान को
अपने पास बुलाया और पूछा-" मैंने सुना हैं कि  हर आदमी की शक्ल के सात
लोग इस पृथ्वी  पर होते हैं ?"
 सुलेमान ये सुनकर बहुत हंसा और इतना हंसा कि उसकी आँखों से आंसूं बहने
लगे और उसे ठसका लग गया I
उसकी जैसे सांस रुक गई पर उसने हंसना बंद नहीं किया I
 सुलतान ने ये देखकर चांदी के चमचमाते हुए गिलास को उठाया और बोला  -"
पानी पी ले, मेरे भाई....और आराम से बता I"
सुलेमान ने एक ही सांस में पूरा गिलास खाली  करते हुए सुलतान के चेहरे की
तरफ़  देखा जहाँ पर केवल संजीदगी के भाव थे I "
यह देखकर सुलेमान थोड़ा सा  डरा क्योंकि बचपन से साथ रहते हुए वह सुलतान
के गुस्से के बारे में भी जानता था I उसने धीमे से कहा -" अब्बू ने एक
बार बताया तो था I "
" तो फिर, क्या तुम्हारे मन में कभी नहीं आया कि तुम खुद से मिलो ?”
पर वो तो अलग हुआ ना  , सिर्फ शक्ल मिलने से हमारी किस्मत, आदत ,माँ,
बाप सब एक थोड़ी ही हो जाते है   I "
पर चेहरा तो एक हैं ना  ...सुलतान अपनी बात पर जोर देता हुआ बोला
ये सब तो तब पता चलेगा ना  , जब तुम्हें वो खुद बताएगा
सुलेमान के चेहरे पर अचरज भरे भाव देखकर सुलतान ने आगे बोलना शुरू किया
मान लो, तुम मेरे कमरे में  आये और मेरी जगह मेरा हमशक्ल बैठा हैं तो तुम
तो उसे ही तुम्हारा दोस्त मानोगे ना..
सुलेमान ताली पीटता  हुआ बोला -" मैं समझ गया... सब समझ गया I "
" क्या समझ गए तुम  ?"
यही कि अब तुम मुझसे कहोगे कि हमें उन चेहरों को ढूंढे   और हँसू नहीं तो क्या करू
मजाक नहीं कर रहा हूँ....जा रहा हूँ मेरे सात हमशक्ल ढूंढने के लिए
पर तुम अकेले कैसे जाओगे ..सुलेमान अचानक ज़मीन से उचककर खड़ा हो गया मानो
उसने बिजली का नंगा तार छू लिया हो
तुम्हारा दिमाग तो नहीं खराब हो गया हैं I मैं तुम्हें इतनी लम्बी यात्रा
पर अकेले नहीं जाने दूँगा I "
सुलतान अपने बेशकीमती कपड़ों पर इत्र  लगाता हुआ बोला - " रुको जरा, तुम
मुझे सुकून से गुलाब के फूलों की भीनी भीनी खुशबू में अकेले रहने दो I.
सुलेमान के लिए इतना इशारा काफी था सुलतान जब कोई निश्चय कर लेता  था
तो उसे डिगाना असंभव था I वो बिना कुछ कमरे से निकल गया पर उसके दिमाग
में न जाने कितनी बातें एक साथ चल रही थी  I
वह सीधा अपने मामा गोगा के यहाँ पहुंचा जो कि एक बहुत बड़े जादूगर थे और
उनके पास ना  जाने कितने यक्ष,गन्धर्व और भूत प्रेत रहते थे I
सुलेमान जब मामा के यहाँ पहुंचा तो हमेशा की तरह उनका पालतू कुत्ता जीनों
हवा में उड़ रहा था I निनी मुर्गी हल चला रही थी I इतनी नन्ही सी मुर्गी
को हल चलाते देखकर सुलेमान जोरो से हंस पड़ा I
तभी मामा की सबसे प्यारी भूरी बिल्ली उड़ते हुए आई और उसे प्यार करने लगी
I सुलेमान हँसते हुए बोला -" क्या करुँ, भूल ही जाता हूँ कि मामा बहुत
बड़े जादूगर हैं और उन्होंने अपने जादू से तुम सबको ऐसी अद्भुत शक्तियां
दी हैं जिससे तुम सब आराम से  जो चाहो कर सकते हो
अंकल  खलील   का  चेहरा  सुलेमान  को  देखते  ही  ख़ुशी  से  खिल  उठा I
वो बिलकुल बच्चों की तरह उसे अपने गले से लगाने के लिए दौड़े I सुलेमान यह
देखकर आगे बढ़ा और अंकल के गले लग गया I भूरी  बिल्ली यह देखकर इतना खुश
हो गई कि उचककर अंकल के कंधे पर बैठ गई और बोली-" जल्दी से चलकर सुलेमान
को मेरे दूध का कुआँ दिखा दो I यह सुनकर अंकल हँसते हुए बोले-" ओह, तो
तुमने सुलेमान को भी अपने स्पेशल गिफ्ट के बारे में बता दिया .." सुलेमान
यह सुनकर बोला-" आखिर यह आपकी सबसे दुलारी बिल्ली जो है I " दूध का कुआँ
देखकर तो सुलेमान आश्चर्यचकित रह गया और हँसते हुए भूरी से बोला-" तो
अगली बार बर्थडे पर क्या मांगोगी ?" एक चॉकलेट का पेड़..भूरी ख़ुशी से ताली
बजाती हुई बोली
अंकल ने भूरी के सर पर प्यार से हाथ फेरा और सुलेमान से पूछा -" तुम हँस
तो रहे हो , पर मैं देख रहा हूँ कि तुम्हें कोई चिंता खाये जा रही हैं
हाँ, अंकल..मैं उसी बारे मैं आपसे बात करने आया था ..सुलेमान बोला और फिर
उसने  उन्हें सारी बातें बताते हुए कहा -" अब आप ही बताइए कि पूरी
दुनियाँ में वो अपने जैसे सात चेहरे ढूँढकर कहाँ से लाएगा ?" अंकल ने
मुस्कुराते हुए जवाब दिया-" तुम उसकी बिलकुल चिंता मत करो मैं तुम्हें
कुछ ऐसी जादुई वस्तुएं दूँगा जिससे तुम अपनी और सुलतान की रक्षा हमेशा कर
सकोगे और सही सलामत वापस आ जाओगे I
सुलेमान यह सुनकर बहुत खुश हो गया और उत्सुकता से बोला-" जल्दी दिखाइए
मुझे वो नायब वस्तुएँ  I
अंकल बोले -" सबसे पहले तो ये भूरी बिल्ली ही हैं जो जब चाहे उड़ सकती और
मिलो  दूर का सफ़र  पलक  झपकते ही तय कर सकती हैं I"
भूरी बिल्ली यह सुनकर थोड़ा सा इतराई और बोली-" पर मेरी बातें तो पूरे समय
चलती रहेंगी उन्हें बंद करने का ना सोचना I
सुलेमान हँसते हुए बोला-" बिलकुल नहीं तुम जितना चाहे बोलना, फिर अंकल ने
उसे एक रस्सी का टुकड़ा दिया और बोले-" इससे तुम एक साथ हज़ारों लोगो को
बाँध सकते हो I भूरी बिल्ली हँसते हुए बोली-" हाहा, यह तो मेरी पूँछ से
भी छोटा हैं..I
सुलेमान और अंकल भी भूरी की बात सुनकर जोरो से हँस पड़े I
एक काँच का चमकता हुआ टुकड़ा अँकल ने अपने झोले से निकालकर सुलेमान को
दिया और बोले-" इस टुकड़े को तुम एक बार हवा में उछालकर जब दुबारा अपने
हाथ में पकड़ोगे ,तो यह जगमगाता हुआ पहाड़ बन जाएगा I
इसके अंदर से इतनी रौशनी निकलेगी कि वहाँ खड़े लोगो को कुछ भी नहीं दिखाई देगा I
सुलेमान बोला..आपने तो मेरी बहुत मदद कर दी अँकल
हाँ, क्योंकि तुम जिन लोगो के बीच जा रहे हो उनके पास और भी बहुत बड़ी बड़ी
शक्तियाँ हैं और जिनसे मुकाबला करना  बहुत कठिन हैं
यह आखिरी  दो अमूल्य वस्तुए लो जिनकी तुम्हें शायद जरुरत पड़  जाए I
यह सुरमा हैं जिसे दांई  आँख  पर लगाने से तुम्हें अदृश्य लोग भी दिखाई
देने लगेंगे और बाई आँख पर लगाने से तुम अदृश्य हो जाओगे I
और इस कांच की शीशी  में गुलाबी जादुई पानी हैं जिसे किसी पर भी छिड़कते
ही वो पत्थर से वापस अपने असली रूप में आ जाएगा I
सुलेमान खुश होते हुए अंकल के गले लग गया और वहाँ से सभी चमत्कारी
वस्तुओं को लेकर जाने लगा I
उसे जाते देख अंकल के मन में एक विचार आया और वो बोले रुको-" अगडम बगडम
ठम्पल ठुड़सा "
और यह कहते ही उन्होंने अपने हाथ से कुछ सुनहरे नन्हें मोती निकालकर
सुलेमान को दिए और बोले-" तुम्हें ना जाने कितने मीलों का सफर तय करना
हैं इसलिए तुम जिसका चाहो उस रूप को धर के पलक झपकते ही उस जगह पर पहुँच
सकते हो जहाँ तुम जाना चाहते हो I"
सुलेमान की ख़ुशी का यह सुनकर ठिकाना नहीं रहा I वह जल्दी से जल्दी जाकर
सुलतान को यह सब चीजे दिखा देना चाहता था I
तभी उसने देखा कि  भूरी बिल्ली भी उड़ती हुई उसके साथ चल रही हैं I
यह देखकर सुलेमान ने उससे पूछा-" जब मैं पैदल चल रहा हूँ तो तुम क्यों
हवा में उड़ रही हो I
तुम भी मेरे साथ पैदल चलो I
ना ना, मैं अपने कोमल मुलायम और सुन्दर पंजों को इस धूल भरी जमीन पर नहीं
रखूंगी I पहले तुम मुझे नन्ही नन्ही मखमल की खूबसूरत चप्पले बनवाकर दो
तभी मैं ज़मीन पर  चलूंगी I
सुलेमान बोला-" अच्छा, तुम महल में चलो, मैं तुम्हारे लिए वहाँ जितनी
चाहो उतनी मखमल की चप्पले बनवा दूंगा I "
भूरी हमेशा की तरह खुश होती हुई सुलेमान के कन्धे पर उचककर बैठ गईI
जब सुलेमान महल के अंदर जाकर सुलतान के कक्ष में पहुंचा तो सुलतान को ना
पाकर बैचेन हो गया और उसने तुरंत इधर उधर ढूँढना शुरू किया I वो किसी भी
पहरेदार या सैनिक से इसलिए नहीं पूछना चाहता था ताकि वे सब सुलतान की
सुरक्षा को लेकर घबरा ना जाए और उसे ढूँढने उसके पीछे ना चल दे  I जब
सुलेमान ने महल का कोना कोना छान मारा तो थक हार कर बैठ गया और समझ गया
कि अपनी धुन का पक्का सुलतान उसके आने से पहले ही अपने घोड़े फ़तेह पर
बैठकर निकल चुका हैं I उधर दूसरी ओर तेज धूप और गर्म हवा की परवाह किये
बगैर सुलतान का घोड़ा हवा की गति से बात कर रहा था I जबसे सुलतान ने
घुड़सवारी करनी शुरू की थी उसने फ़तेह को एक पल के लिए भी अपने से जुदा
नहीं किया था I उसे लगता था जैसे फ़तेह उसकी हर बात समझता हैं और उसके
दुःख दर्द में बराबर का भागीदार हैं आखिर जब सुलतान को चक्कर ऐसे आने लगे
तो उसने फ़तेह को बड़े प्यार से थपथपाया और पलक झपके ही फ़तेह रुक गया  I
तभी अचानक उसे चक्कर ऐसा आ गया और वो उस चिलचिलाती धूप में बेदम होकर वही
धड़ाम  से गिर पड़ा I गर्म हवा उसकी पीठ पर मानों लावा बहा रही थी I गुलाबी
होंठ सूखकर  पपड़ी जैसे हुए जा रहे थे पर उसमे इतनी भी ताकत नहीं थी कि वो
उठकर बैठ पाता और किसी को मदद ले लिए पुकारता I अचानक उसे लगा जैसे गर्म
लाल दहकता सूरज उसके करीब आता जा रहा था I सुलेमान ने दर्द से अपने
होंठों को इतनी जोर से भींचा कि उसके निचले होंठ से खून निकलने लगा और
फिर धीरे धीरे जैसे सूरज ने उसे पूरी तरह गिरफ्त में ले लिया I ठन्डे
पानी के छीटें  जब उसके चेहरे पर पड़ी तो जैसे वह किसी गहरी  तूफानी सुरंग
से बाहर निकलने लगा I
लाल लाल दहकती हुई सुरंग की दीवारें जैसे उसे वहाँ  से जाने ही नहीं दे
रही थी , अब इस दर्द में जैसे एक अजीब सा सुकून मिलने लगा था I जब उसे
होश आया तो उसका सर सुलतान की गोद में था I सुलेमान, मेरे दोस्त..सुलतान
ने सुलेमान की ओर देखते हुए धीमे से कहा
" सुलेमान उसके चेहरे को ठन्डे पानी में भीगे कपड़े से पोंछता हुआ बोला-"
तुमने सोच भी कैसे लिया कि मैं तुम्हारे साथ नहीं आऊंगा?
यह सुनकर सुलतान में ना जाने कहाँ से ताकत आ गई और उसने उठकर सुलेमान को
गले से लगा लिया
थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद जब वे लोग चलने के लिए तैयार हुए
तो देखा भूरी भी उड़ती हुई चली आ रही है I सुलतान उसको देखकर आश्चर्य  में
पड़ गया तो भूरी हँसते हुए बोली-" मेरे बारे में तुम्हें सुलेमान बाद में
सब बता देगा , पहले चलो हम तुम्हारें " हमशक्ल मिशन"  पर चले I   उसकी
बात सुनकर दोनों जोरों से हँस पड़े I तभी सुलतान बोला-" मुझे सपना आया था
कि मेरा पहला हमशक्ल पाताल लोक में हैं और उनके बारे में हमें जंगल में
एक बहुत पेड़ के नीचे बैठे हुए दो बौने बताएँगे I "हाँ..हाँ..चलो जल्दी से
हमें अब यहाँ से चलना चाहिए" सुलेमान सुलतान को उठाते हुए बोला I
झुरमुट के बीच से कहीं -कहीं झाँकती सूरज की हल्की चमकीली रौशनी मानों
नदी की चमचमाती लहरों सी हरे भरे पत्तों के बीच लुका छिपी खेल रही थी I
पर फिर भी जँगल तो जँगल ही था     जिसका न तो कोई ओर था और ना ही
छोर..सुलेमान और सुलतान चलते चलते बुरी तरह थक गए ..सुलेमान बोला-: मैं
कितनी देर से कह रहा हूँ कि हम लोग उड़ कर चलते हैं I कम से कम इतने दर्द
से तो बचे रहेंगे I सुलतान फीकी सी मुस्कराहट के साथ बोला-" अगर हम ज़मीन
पर नहीं चलेंगे तो  तालियों की आवाज़ की गूँज हमें कहाँ से सुनाई देगी, जो
हमारे  पैरों से टकराकर हमें पाताल लोक ले जायेगी I सुलेमान चौंकते हुए
बोला-" दर्द और परेशानी में इतनी जरुरी बात कैसे भूल गया मैं "
तभी भूरी बिल्ली उड़ती हुई आई और बोली - " आगे जो भी सबसे बड़ा पेड़ मिलेगा
उसके नीचे दो बौने बैठे हैं....पर वो इतने छोटे हैं जैसे चूहे तुम्हें
उन्हें बहुत ध्यान से देखना हैं I" सुल्तान बोला-" हाँ, जानता हूँ वरना
अगर हम पेड़ के आगे निकल गए तो हम दूसरे चेहरे को नहीं खोज पाएंगे I "
तभी भूरी बिल्ली बोली- " अब ज़रा आराम से चलो..वो पेड़ आने ही वाला हैं I"
यह सुनकर दोनों ने बड़े ही सधे हुए क़दमों से चलना शुरू किया और अचानक एक
पेड़ के नीचे दो बहुत छोटे बौने देखे जिन्हें देखकर उन्हें बहुत आश्चर्य
हुआ I वे दोनों उनके पास गए और बैठ गए I सुल्तान ने अपनी जेब से शहद
निकाला और हथेली पर रखकर उनके आगे कर दिया I शहद देखते ही उन दोनों के
चेहरे ख़ुशी से चमकने लगे और वे दोनों कूद कर सुलतान की हथेली में आ कर
बैठ गए I बस फिर क्या था दोनों ने एक दूसरे की ओर देखा और शहद पर टूट पड़े
I पलक झपकते ही उन दोनों ने सारा शहद चाट लिया और सुलतान की हथेली से
नीचे उतर गए I
तभी वहाँ चारों तरफ धुँआ छा गया और वे दोनों बौने बहुत लम्बे चौड़े और
भारी डील डौल के हो गए I सुलतान और सुलेमान उन्हें देखकर थोड़ा सा डरे और
भूरी बिल्ली हमेशा की तरह सुलेमान के कंधे पर चढ़ गई I
वे बोले -" हमारा नाम खिलू और पीलू हैं I आज तुम्हारे शहद के कारण ही हम
अपना असली रूप वापस पा सके हैं ..बोलो हम तुम्हारी क्या सहायता कर सकते
हैं भूरी बिल्ली चिल्लाई -" तुम सहायता बाद में करना I पहले तो तुम
दोनों जरा साँस धीमे लो I कहीं हम सब उड़ ना जाए I " यह सुनकर खिलु और
पीलू हँस पड़े और धीरे धीरे अपना आकार घटाते  हुए आदम कद हो गए I
खिलु बोला-" बोलो, हम तुम्हारी क्या सहायता करे ?."
सुलतान  बोला-" यहाँ से कोई रास्ता पाताल लोक की ओर जाता हैं , तुम हमें
वहाँ तक  पहुँचा दो और जब तक हम मेरे जैसे दूसरे शक्ल वाले आदमी को
ढूँढ़कर उसकी सहायता ना कर दे तब तक तुम हमारे साथ ही रहना I"
बस, इतनी सी बात
हम चलते हैं ना साथ मैं ....तुम दोनों हमारे कंधे पर बैठ जाओ I
ओह...पर  तुम जरा सा भी हँसना मत, वरना हमारी हड्डी पसली टूट जायेगी I "
भूरी हमेशा की तरह बिना बोले रह ना सकी
पीलू और खीलू उसकी यह बात सुनकर जोर से हँस पड़े ......
अचानक खीलू बोला-" सब लोग अपनी आँखें बंद कर लो I.तुम्हें बार बार लगेगा
कि कोई तुम्हें आँखें खोलने के लिए कह रहा हैं पर तुम उन आवाज़ों पर
बिलकुल भी ध्यान मत देना वरना सब के सब ऊपर आसमान में चले जाओगे  और फिर
वापस धरती पर  कभी भी नहीं लौट सकोगे I " अरे वाह, पर मैं तो कभी आसमान
में नहीं गई हूँ..कितना मज़ा आता होगा ना बादलों के बीच...भूरी बड़ी अदा से
बोली
हाँ, हाँ, क्यों नहीं और जब बादल भाप बनकर उड़ जाएँगे, तब तुम भी उनके साथ
उड़कर किसी समुद्र में गिर जाना और ज़िंदगी भर तैरती रहना I
यह सुनकर भूरी डर गई और उसने सुलेमान को कस कर पकड़ लिया
सुलतान यह देखकर मुस्कुराया और उसने सबके साथ अपनी आँखें बंद कर ली I
उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे वो लोग नीचे की ओर बहुत तेजी से बढ़े चले जा रहे हैं I
भूरी को तो गुदगुदी भी हो रही थी पर इस बार वो बिलकुल चुप थी आखिर समुद्र
में रहने वाली बात उसके ज़हन से अभी पूरी तरह उतरी नहीं थी I
तभी सुलतान के कान में पीलू की आवाज़ आई-" आँखें खोलो
सुलतान आँखें खोलने ही वाला था कि पीलू की आवाज़ दुबारा आई-" कोई भी आँखें
मत खोलना .....वो आवाज़ें तुम्हें हमारी भी लग सकती हैं I "
यह सुनकर सुलतान सावधान हो गया और उसने जोर से आँखें भींच ली I तभी अचानक
उन लोगों को लगा कि उनके पैर मुलायम घास पर हैं और  ठंडी हवा के झोंके
उन्हें चारों ओर से आ रहे हैं I वो सब जैसे एक नई ताजगी और स्फूर्ति से
भर उठे I
तभी खीलू बोला-" दोस्तों, हम पाताल लोक पहुँच गए हैं और अब तुम सब अपनी
आँखें खोल सकते हो I
भूरी ने यह सुनकर अपनी आँखें और जोरों से बंद कर ली और कहा -" तुम पता
नहीं कौन बोल रहे हो और मुझे समुद्र में नहीं तैरना हैं I
यह सुनकर पीलू जोरो से हँसा और बोला-" देखो, अब हमारा नीचे की तरफ उतरना
बंद हो गया हैं ना..क्योंकि हम इस समय पाताल लोक में खड़े हैं I "
यह सुनकर सबने अपनी आँखें  खोल ली I
सामने का दृश्य देखते ही जैसे सब को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं  हुआ I
सामने जो महल था वो रूई का बना हुआ था और हवा के साथ बड़े  ही आराम से
हिलता डुलता इधर उधर जा रहा था I
महल में रंग बिरंगे नगीने जड़े हुए थे जो चमकीली धूप के कारण जगमग-जगमग कर
रहे थे I सुलतान बोला-" रूई के इस महल में लोग क्या सारे समय हिलते डुलते
नहीं रहते होंगे I हिलना तो छोड़ो, क्या यह महल टूट नहीं जाता होगा..आखिर
रूई कितने लोगो का भार संभाल सकती हैं I
रूई के महल में से तो हलकी हलकी नीली रौशनी निकल रही हैं..सुलतान ने
हैरान होते हुए कहा
हाँ, मुझे लगता हैं कि जैसे  किसी का फाउंटेन पेन टूट कर गिर गया हैं, और
उसकी स्याही बिखर गई हैं..हमेशा की तरह भूरी खुश होते हुए बोली
उसकी बात सुनकर पीलू और खीलू ने ऐसा जोरदार ठहाका लगाया की वहाँ खड़े पेड़
भी हल्के से काँप उठे I
सुलेमान इधर उधर गौर से देखते हुए बोला-" बड़ी अजीब बात हैं ना, हमें तो
कोई इंसान या जानवर यहाँ पर दिखाई ही नहीं दे रहा हैं I
चलो, अंदर चलकर देखते हैं ..सुलतान ने जवाब दिया
जैसे जैसे वे लोग महल के पास जा रहे थे , उन्हें ठण्ड लग रही थी I
महल के पास पहुँचते ही उन्हें लगा कि ठण्ड के मारे वे सब अकड़ जाएंगे I
सुलतान बोला-"अरे  , ये तो बर्फ़ का महल हैं I
भूरी तुरंत सुलेमान के कंधे से कूदी -" कहीं दूध का महल तो नहीं हैं, मैं
क्या चाटकर देखू I "
हा..जाओ और जब ज़ुबान अगर हमेशा के लिए महल से चिपक जाए तो हम खींच लेंगे
और तुम गूंगी होगी तो मज़ा ही आ जाएगा हम सबको
ओह..ये तो मैंने सोचा ही नहीं था...मैं सब चीजो के बिना  रह सकती हूँ पर
बिना बोले नहीं रह सकती I
पीलू भूरी से बोला-" अब अगर तुम्हारी बक बक बंद हो गई हो तो क्या हम अंदर चले I
..मैं सिर्फ़  बोल रही हूँ तुम्हें महल के बाहर नहीं खींच रही हूँ..भूरी
गुस्से से बोली और कूद कर वापस सुलेमान के कंधे पर चढ़ गई I
जब वे लोग अंदर पहुँचे तो वहाँ का नज़ारा देखकर अचंभित रह गए I सामने एक
बहुत बड़ा सिंहासन था जिस पर सुलतान का हमशक्ल बैठा हुआ था I उसके सर पर
बर्फ के नुकीले तीरों का मुकुट था जिससे उसके माथे पर सैकड़ों घाव हो गए
थे  ओर उनसे खून टपक रहा था I सभी को यह देखकर जैसे काठ मार गया I
सुलेमान हकलाता हुआ सा बोला-" ये तो ऐसा लग रहा हैं कि तुम सामने बैठे हो
I " सुलतान सुलेमान कि बातों को अनसुना सा करते आगे बढ़ा पर अचानक ही उसे
लगा कि वो हवा में तैर रहा हैं ओर देखते ही देखते वो गुब्बरव सा हवा में
उड़ने लगा I
यह देखकर जैसे ही सुलेमान आगे बढ़ने लगा, सुलतान जोर से चिल्लाया-" आगे एक
कदम भी मत बढ़ाना I क्या तुम्हें भी मेरी तरह हवा में उड़ने का मन हैं ? "
उसके चिल्लाने की आवाज़ सुनकर सुलतान के हमशक्ल ने बड़ी ही मुश्किल से अपनी
गर्दन उठाई जो बर्फ के तीरो के भार के कारण नीचे झुकी जा रही थी I
सुलतान को देखकर उसके दर्द भरे चेहरे पर एक फीकी मुस्कान आ गई और वो
बोला-" तो तुम आ ही गए मेरे दोस्त, अब मैं बच जाऊँगा I "
सुलतान जो कि अभी भी हवा में उड़ रहा था आश्चर्यचकित रह गया ओर बोला-"
क्या तुम जानते थे कि मैं आऊंगा I
" हाँ, मैं जानता था ..
ना चाहते हुए भी सुलतान बार बार दीवार में लड़ रहा था जिससे उसके पैरों
में बेइंतहा दर्द होने लगा था I तभी उसका हमशक्ल राजा बोला-अगर इस बादल
को कोई घोड़ा अपनी पूँछ से जोरदार फटकार मारे तो बादल तुमसे अलग हो जाएगा
और फिर यही बादल  मेरे बर्फ के नुकीले तीरों को अपने अंदर समेट लेगा
जिसके कारण मैं यहाँ के तिलिस्म से आज़ाद होकर वापस  पहले जैसा हो जाऊँगा
I
सुलतान को यह सुनते ही फ़तेह की याद आई ..उसने जोर से आवाज़ लगाईं " मेरे
दोस्त फ़तेह..मुझे तुम्हारी जरुरत हैं ..I "
फ़तेह जो कि मीलों दूर की आवाज़ों को भी बड़े आराम से सुन सकता था, पलक
झपकते ही वो सुलतान की आवाज़ की दिशा में दौड़ पड़ा I जैसे ही फ़तेह महल के
अंदर पहुंचा तो सुलतान का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा I
वो जोर से चिल्लाया-" मेरे भाई..जल्दी से इस बादल के टुकड़े को मुझसे अलग कर I"
पर ये क्या..सुलतान की बात का फ़तेह ने कोई जवाब नहीं दिया वो वहाँ पर
चुपचाप खड़ा रहा I यह देखकर सुलतान थोड़ा जोर से बोला-" फ़तेह...जल्दी से
आगे बढ़ो और इस बादल को मुझसे अलग करो I" पर फ़तेह ना तो हिला और ना ही
डुला I वो बिलकुल सुन्न खड़ा था I
सुलतान गुस्से से तमतमाता हुआ बोला-" फ़तेह, मैंने तुझे सबसे बढ़कर माना और
तू मेरी ही बात नहीं सुन रहा हैं I "
यह सुनकर उसका हमशक्ल राजा बड़ी मुश्किल से अपना सर धीरे से उठाते हुए
बोला-" तुम क्या मुझे छुड़ाना इतना आसान समझे थे, कि घोड़े को बुलाते ही
मैं बड़ी आसानी से यहाँ के तिलिस्म से मुक्त हो जाऊँगा I"
सुलतान हैरत से बोला-" तुम्हारी बात मेरी समझ में नहीं आ रही हैं I "
हमशक्ल राजा बोला-" तुम्हारा घोड़ा यहाँ के जादू के प्रभाव से मूर्ति
जैसा बन गया हैं I
 वो तुम्हारी बात सुन और समझ तो रहा हैं, पर वो बेचारा बिलकुल भी हिल-डुल
नहीं सकता हैं और तो और उसके पैरों की तरफ तो देखो जरा .. सुलतान ने यह
सुनते ही फ़तेह के पैरों की तऱफ देखा जिनमें लम्बी और काली बहुत सारी जोंक
 चिपकी हुई उसका खून पी रही थी I
सुलतान यह देखकर दर्द से तड़प उठा उसने मदद के लिए सुलेमान को पुकारना
चाहा पर उसकी आवाज़ जैसे बंद हो गई I " तभी हमशक्ल राजा कराहते हुए बोला-
" अगर तुम अपनी आवाज़  वापस पाना चाहते हो तो तुम्हें फर्श पर उस जगह
कूदना होगा, जहाँ बहुत गहरा कुआँ दिख रहा हैं I "
पर मैं तो मर जाऊँगा उसमे गिरके..वो तो सूखा कुआँ हैं...सुलतान घबराता हुआ बोला
नहीं नहीं...वो सिर्फ़ तुम्हें कुआँ दिख रहा हैं, बल्कि वहाँ तो मलमल का
मुलायम बहुत मोटा गद्दा बिछा हैं जिसमें गिरने से तुम्हें जरा सी भी चोट
नहीं आएगी I"
सुलतान यह सुनकर थोड़ा सा डरते हुए कुँए के अंदर कूद गया पर आश्चर्य....
उसके गिरते ही वहाँ पर बहुत मोटे और मुलायम मखमली गद्दे आ गए , जिसके
कारण उसे जरा सा भी दर्द नहीं हुआ I सुलतान ने अब जोर से सुलेमान को आवाज़
लगाई पर सुलेमान कहीं भी नज़र नहीं आ रहा था I
तभी अचानक उसने एक गड्ढे से जोंकों की लम्बी कतार को जाते देखा जो फ़तेह
के पैरों का खून चूसने के लिए जा रही थी I उसने फ़तेह की ओर देखा जिसकी
आँखों से मोटे मोटे आँसूं गिर रहे थे I सुलतान का कलेजा रो उठा I
वो गुस्से में काँपता  हुए उठा और पास जल रही मशाल को उसी गड्ढें में डाल
दिया जिससे सारी जोंक चट- चट की आवाज़ करते हुए जलने लगी I फ़तेह के पैरों
से भी चिपकी हुई जोंक जैसे गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी वे भी उसके
पैरों  से छिटककर दूर हो गई और अपने आप ही उस आग में उन जोंकों के पीछे
कूद गई I
जोंकों के हटते ही फ़तेह आज़ाद हो गया और हवा की गति से उछलकर उसने बादल की
टुकड़े को अपनी पूँछ बड़ी फुर्ती से मारी जिससे बादल सुलतान से अलग होकर
सीधा सुलतान के हमशक्ल राजा के सर पर लगे बर्फ से बने नुकीले तीरों में
जा घुसा और एक -एक करके सारे तीर बादल के अन्दर चले गए और  हमशक्ल राजा
उन नुकीले तीरों के दर्द से मुक्त हो गया I
तभी वहाँ पर चमचमाती हुई  बिजली  चमकने लगी और बादल गड़गड़ाने लगे I हमशक्ल
राजा के ज़ख्म भी तुरंत भरने लगे और वो बिलकुल स्वस्थ हो गया I
वो दौड़कर सुलतान के गले लिपट गया और ख़ुशी के मारे फूट फूट के रोने लगा I
वो अपनी ख़ुशी को शब्दों की द्वारा व्यक्त नहीं कर पाया और सुलतान के
पैरों की तरफ बढ़ने लगा I सुलतान ने भावुक होते हुए उसे जोर से गले से लगा
लिया I
सुलतान बोला-" पर मेरे सारे दोस्त कहाँ चले गए ?" वो सब महल के बाहर हैं
क्योंकि उन्हें यहाँ के तिलिस्म ने जादू से बाहर कर दिया था I पर अब हमें
भी यहाँ नहीं रुकना चाहिए क्योंकि कुछ देर बाद ही यहाँ पानी ही पानी भर
जाएगा और हम सब उसमें डूब जाएँगे I" सुलतान बोला-" तुम बिलकुल चिंता मत
करो, फ़तेह हैं ना, वो हमें पलक झपकते ही यहाँ से बाहर पहुँचा देगा I
फ़तेह ने यह सुनकर अपने आगे के दो पैर उठाकर मटकना शुरू कर दिया I सुलतान
बड़े ही प्यार से उसके गले में बाहें डालता हुआ बोला-" हम सब एक साथ
नाचेंगे फ़तेह, अभी यहाँ से हमें जल्दी से निकलना हैं और यह कहते हुए
सुलतान हमशक्ल राजा के साथ फ़तेह पर चढ़ गया और जब तक वो अपनी पलक बंद करते
तब तक फ़तेह उन्हें लेकर महल के बाहर जा चुका था I
सुलतान ने देखा कि सुलेमान के कंधे पर भूरी बैठी हुई है और पीलू और खीलू
एक पेड़ को हाथ में पकड़कर हवा में नचा रहे हैं I
सुलेमान सुलतान को देखकर उसके पास दौड़ता हुआ आया और बोला-" हमें तुरंत अब
यहाँ से बाहर निकलना चाहिए I "
नहीं चाहते हुए भी उसके हमशक्ल राजा की आँखों में आँसूं झिलमिला उठे  I
सुलतान ने पूछा-" तुम्हारा  नाम तो मैं पूछना ही भूल गया I
"सिकंदर" - भूरी यह सुनकर जोर से ठहाका मारकर हँस पड़ी और बोली-" यहाँ पर
तो सिर्फ मैं ही स्पेशल हूँ I"
सुलेमान ने हैरत से उसे देखते हुए कहा-" क्यों, ऐसी क्या ख़ास बात हैं
तुममें ?” क्योंकि यहाँ पर तुम सभी दोस्तों का नाम एस से शुरू हो रहा
हैं, पर सिर्फ़ मेरा ही नाम बी से स्टार्ट हैं..उसकी इतनी अक्लमंदी भरी
बात सुनकर वहाँ हँसी का फव्वारा फूट  पड़ा I
पीलू और खीलू ने सुलेमान को अपने कंधे पर बैठा लिया और वे दोनों आसमान की
ओर उठने लगे I
सुलतान सिकंदर की तरफ़  देखकर मुस्कुराते हुए बोला-" हम तुम्हें तुम्हारे
देश छोड़ देते हैं उसके बाद हम अपने आगे के सफर पर निकलेंगे I "
सिकंदर ने यह सुनकर ख़ुशी के मारे सुलतान को गले से लगा लिया I
सुलतान सुलेमान से बोला-" तुम और भूरी, पीलू और खीलू  के कंधे पर बैठ जाओ
और मैं सिकंदर के साथ फ़तेह के साथ जाता हूँ I
भूरी मुहँ बनाते हुए बोली-" हमें तो जब देखो तब कंधें पर चढ़ा देते हो और
खुद आराम से टक-बक टक-बक करते चलते हो I "
सुलतान धीमे से मुस्कुरा दिया क्योंकि वो जानता था कि  भूरी से बोलने में
कोई नहीं जीत सकता I
सिकंदर ने बताया-" यहाँ से दक्षिण दिशा की ओर चलने पर एक चारों ओर
तुम्हें गुलाब  के पेड़ दिखाई देंगे जो  पीले , नारंगी, काले और सफ़ेद रंग
के होंगे I
बस उन्हीं के बीच में एक बहुत बड़ा सफ़ेद  संगमरमर का महल दिखेगा वो मेरा हैं ..
कहते हुए सिकंदर की आँखें छलछला उठी  " हाँ..बिलकुल, हम बस अभी पहुँच जाएंगे ..
सुलतान मुस्कुराकर बोला
नहीं , नहीं, वो यहाँ से बहुत दूर  हैं..इतनी दूर कि तुम कल्पना भी नहीं
कर सकते....हमें शायद कई दिन और उससे भी कहीं ज्यादा रातें लग जाएंगी I "
तुम मेरे फ़तेह को नहीं जानतें हो ना  , तभी ऐसी बातें कर रहे हो ..क्यों
फ़तेह ? सुलतान ने प्यार से फ़तेह को पुचकारते हुए कहा और फ़तेह सुलतान से
अपनी तारीफ़ सुनकर बहुत खुश हो गया और जोर जोर से हिनहिनाकर अपना प्यार
दिखाने लगा I
फ़तेह, अब जल्दी से सिकंदर के बताए  हुए रास्ते पर पहुँचो और सिकंदर तुम
अपनी आँखें बंद कर लो I
कुछ ही देर बाद सिकंदर को गुलाब के फूलों की महक ने लगी तो उसकी आँखें
अपने आप ही खुल गई I
वो अपने महल के बाहर ढेर सारे गुलाबों के बीच में खड़ा था I
सुलतान घोड़े से उतरता हुआ बोला-" तुम्हारा महल आ गया अब तुम जाकर अपने
परिवार वालों से मिलो मैं अब चलता हूँ I "
नहीं, मैं तुम्हें नहीं जाने दूंगा कहते हुए सिकंदर उसके गले लगकर बच्चों
की तरह सुबकने लगा I
तब तक सुलेमान और भूरी भी खीलू और पीलू के साथ आ गए थे I
वे सब भी सिकंदर को रोता देखकर  चुपचाप खड़े थे  I
तभी हमेशा की तरह भूरी बोली-" पहले सिकंदर इसलिए रो रहा था कि वो  घर से
दूर था और अब ये इसलिए रो रहा हैं कि इसका घर आ गया हैं, मुझे तो इंसान
का स्वभाव कुछ समझ ही नहीं आता …..
भूरी की बात सुनकर सभी ठहाका मारकर हँस पड़े और सिकंदर के होठों पर भी
मुस्कान आ गई I
सिकंदर को खुश देखकर सुलतान घोड़े से उतरा और बोला-" बस हमेशा इसी तरह से
तुम हँसते मुस्कुराते रहना I अब तुम्हारे दुःख के सारे दिन कट चुके हैं
I"
सुलेमान का इतना अपनापन देखकर सिकंदर की आँखों में आँसूं  आ गए और उसने
डबडबाती हुई आँखों से अपने हाथ में जगमगाती हुई हीरे के अंगूठी निकाली और
सुलतान के दायें हाथ की बीच वाली ऊँगली में पहना दी I
सुलतान कुछ बोलता इससे पहले सिकंदर बोला-" ना मत करना मेरे दोस्त, यह एक
जादुई अंगूठी हैं I "
जादुई अँगूठी सुनकर भूरी सुलेमान के कँधे से कूदकर सुलतान के कँधे पर आ
बैठी और झुककर ध्यान से अंगूठी की तरफ़ देखने लगी I
उसको इस तरह गोल-गोल आँखें नचाता देख सिकंदर और सुलतान जोरो से हँस पड़े
और सुलेमान भी पीलू और खीलू के साथ अपनी हँसी नहीं  रोक सका सुलेमान
मुस्कुराता हुआ आगे बढ़ा और सिकंदर की तरफ देखते हुए बोला-" इस अंगूठी में
ऐसी क्या ख़ास बात हैं मेरे दोस्त I "
सिकंदर ने अंगूठी की तरफ गौर से देखते हुए कहा-" मेरे मामा  बहुत बड़े
जादूगर थे और उन्होंने कई तरह के जिन्न और परियाँ सिद्ध कर रखी थी I
कई बार उन्होंने उन लोगों की मदद भी की जिसके कारण उन सबने  खुश होकर
उन्हें यह जादुई अँगूठी दी थी I
इस अँगूठी को जब भी तीन बार बाएँ हाथ के अंगूठे से घिसोगे तो तुम जितनी
चाहो, उतनी परियाँ और जिन्न तुम्हारी मदद के लिए आ जाएँगे
यह सुनकर सुलतान अचरज से सिकंदर की तरफ देखने लगावो कुछ पूछता कि
हमेशा की तरह ही भूरी लपक कर  बोली-" अच्छा, तो तुमने ही क्यों नहीं
जिन्न और परियाँ बुला ली तुम तो इतने सालों से कैद थे ?"
सुलेमान ने जब गुस्से में घूरकर भूरी की तरफ देखा तो भूरी ने डर कर
सुलतान के गले में हाथ डाल दिया और आँखें बंद कर ली I
सिकंदर ने बड़े ही प्यार से भूरी के सर पर हाथ फेरते हुए कहा-" सुलेमान,
इसमें भूरी के ऊपर नाराज़ मत हो, उसने बिलकुल सही प्रश्न किया I

पर जिस जादूगर ने मुझे सालों से  कैद करके रखा था उसको इस अँगूठी के बारे
में पता था और इसलिए उसने मेरे हाथों को  एक अदृश्य रस्सी से सिहांसन के
दोनों हत्थों पर बाँध रखे था I " सुलतान को याद आया कि जब उसने पहली बार
सिकंदर को बर्फ़ के नुकीले तीरों से बिंधे हुए देखा तो उसने सोचा भी था कि
सर पर इतने नुकीले तीरों के चुभने के बावजूद भी ये राजा अपने हाथों को
आराम से सिहांसन पर रखे बैठा हैं और उन्हें निकाल क्यों नहीं रहा हैं ? "
सिकंदर ने दुखी होते हुए जवाब दिया
फिर वो अँगूठी उन लोगों ने तुमसे छीन क्यों नहीं ली I आखिर ऐसी नायाब
अंगूठी तो पूरे संसार में दूसरी नहीं होगी I "
सुलतान सिकंदर से बोला-" ओह, पर फिर वो अँगूठी उन लोगों ने तुमसे छीन
क्यों नहीं ली I आखिर ऐसी नायाब अंगूठी तो पूरे संसार में  दूसरी नहीं
होगी I "
हाँ, तुम बिलकुल सही कह रहे हो , सिकंदर उसकी हाँ में हाँमिलाता हुआ बोला I
पर इस अंगूठी का जादू तभी काम करेगा जब मैं अपनी मर्जी से इसे किसी को
दूँ और जबरदस्ती मुझसे छीनने पर दूसरे का जो भी जादू होगा वो सब उसी समय
उसी के साथ खत्म हो जाएगा I "
सुलेमान यह सुनकर आश्चर्यचकित रह गया और बोला-" इसका मतलब सुलतान भी अपनी
मर्जी से ही जिसको चाहे यह अँगूठी दे सकता हैं वरना जो ये अंगूठी लेगा
उसका सब - कुछ उसी के साथ खत्म हो जाएगा I "
सिकंदर ने यह सुनकर हामी भरते हुए कहा-" हाँ, और अब इस अंगूठी के बदले
में मैं तुमसे कुछ माँगना चाहता हूँ I "
यह सुनकर भूरी बोली-" क्यों देंगे हम भला तुम्हें कुछ इस अँगूठी के बदले
में, हमने माँगी थोड़ी ही ना हैं तुमसे यह अँगूठी, यह तो तुमने खुद उपहार
के रूप में अपने हाथों से सुलतान की अँगूठी में पहनाई हैं I
पहली बार सुलेमान गुस्से से चीखा-" भूरी, अगर अब तुमने एक भी शब्द और
कहातो मैं तुम्हें जिन्न के हाथों पकड़वाकर उन्हीं के साथ उनकी दुनियाँ
में भेज दूँगा I "
यह सुनते ही भूरी डर कर धीमे से सुलतान के कँधे से उतरकर सिकंदर के पास
चली गई क्योंकि वो जानती थी कि सिकंदर उसे कुछ नहीं कहेगा I
सिकंदर बड़े ही प्यार से भूरी के सर पर हाथ फेरता हुआ सुलतान से  बोला-"
नहीं नहीं, भूरी तो बहुत ही प्यारी हैं I उसके मन में कुछ नहीं रहता और
वो हम सबको दोस्त समझती हैं इसलिए ऐसा कह रही हैं I
मैं सिर्फ़ इतना कह रहा था कि अंगूठी के बदले में मुझे तुम लोगो की दोस्ती
हमेशा के लिए चाहिए हैं I "
आखिरी  वाक्य कहते हुए सिकंदर की आँखों में आँसूं आ गए और वो भूरी को
अपनी गोदी से उतारकर सिकंदर के गले लग गया I "
सुलतान  उसका प्यार देखकर गदगद हो गया और वो सिकंदर से बोला-" हम सब
हमेशा आपस में दोस्त रहेंगे जब मैं अपने  बाकी छह हमशक्लों को भी छुड़ा
लूंगा तो तुम्हारे पास सन्देश भेजूँगा, तुम मेरे पास जरूर आना I "
जरूर आऊँगा  कहते हुए सिकंदर का गला भर्रा गया
सुलतान की आँखें भी नम हो आई थी I पर वो जानता था कि बाकी हमशक्ल भी बहुत
मुसीबतों में  हैं और उसे उन सबको उनकी तकलीफों से मुक्ति दिलानी हैं ,
इसलिए वो घोड़े पर बैठ गया I पीछे से भूरी चिल्लाई-" अरे ,मुझे क्या तुम
लोग सच में छोड़े जा रहे हो ? यह सुनकर वहां एक जोरदार हंसी का ठहाका
गूंजा , जिसे सुनकर सलमान मुस्कुरा उठा और बोला-" हम लोग भला अपनी प्यारी
भूरी को कैसे कहीं छोड़ सकते हैं ? " यह सुनकर भूरी ख़ुशी से इतरा उठी I
और यह कहते हुए सुलतान ने जोरों से एड़ लगाई और पल भर में ही फ़तेह हवा से
बाते करने लगा I पीलू और खीलू भी सुलेमान और सुलतान को लेकर उड़ चले I
रास्ते में उन्हें अजीब से महल दिखाई दिए जो देखने में कागज़ की तरह लग
रहे थे
भूरी बोली -" एक बार मुझे चलकर वो महल दिखा दो, मैंने कभी इतने हिलते हुए
महल नहीं देखे I "
भूरी की बात सुनकर सभी उन महलों को पास से देखने के लिए उत्सुक हो उठे और
धीरे धीरे नीचे की तरफ़ उतरते हुए उन महलों के सामने जाकर खड़े हो गए  I
" नहींइन महलों में तो सब कुछ बहुत ही अजीबो गरीब है.....यहाँ ये
दीवारे कितनी विशाल और मोटी हैं, ऐसा लग रहा हैं कि इन दीवारों को बनाने
में ही ना जाने कितने साल लग गए होंगे I " सुलेमान दीवारों को छूते हुए
बोला
सुलतान उसकी बात पर ध्यान नहीं देते हुए बोला-" पर जब इन दीवारों में
दरवाजा ही नहीं हैं, तो ये लोग आते जाते कैसे होंगे I  "
भूरी बोली -" अरे, उड़कर जाते होंगे, जैसे मैं हूँ..कहीं भी उड़ कर आ जा सकती हूँ I "
पीलू भला कैसे पीछे रहता वो तुरंत बोला-" क्या तुम्हें ये अलग से बताना
पड़ेगा कि दीवारें आकाश तक जा रही हैं तो ये लोग क्या आसमान में रहते
होंगे ? "
सुलतान पीलू की बात सुनकर बोला-" हाँ  , क्यों नहीं ..यहाँ तो सब कुछ हो
सकता हैं I मैं आसमान में जाकर देखता हूँ I"
यह सुनकर सुलेमान उसे हैरानी से देखते हुए बोला -" तुम अपने होश में तो
हो ना ...मैं तुम्हें अकेले कहीं नहीं जाने दूँगा
सुलतान उसके कंधे पर हाथ रखता हुआ बोला-" तुम मेरी बात समझने की कोशिश
करो I मैं ऊपर जाता हूँ और तुम पीलू खीलू के साथ पाताल लोक जाओ I अगर हम
सब लोग एक साथ आसमान पर चले जाएँगे तो जमीन के अंदर कौन जाएगा ?"
हाँ, ये बात भी ठीक हैं ..सुलेमान कुछ सोचता हुआ बोला
ठीक हैं तुम आसमान की ओर जाओ पर पहले ये ले लो और यह कहते हुए उसने अपने
हाथ से कुछ सुनहरे नन्हें मोती निकालकर सुलतान के हथेली पर रखते हुए कहा
-" तुम्हें ना जाने कितनी दूर जाना पड़ेइसलिए तुम जिसका चाहो उसका रूप
धर के पल भर में ही उस जगह पर पहुँच सकते हो जहाँ तुम जाना चाहते हो I "
"पर ये तुम्हें कहाँ से मिले ? सुलतान ने खुश होते हुए आश्चर्य से पूछा
" अरे, सुलेमान के पास तो पूरा जादू का पिटारा हैं जो इसे इसके प्यारे
अंकल खलील ने दिया हैं I "
सुलतान समझ गया कि उस वक़्त उसे सुलेमान महल में क्यों नहीं दिखा था I
उसका प्यार देखकर सुलतान की आँखें भर आई और वो सुलेमान के गले लग गया I.
भूरी बोली-" अब दोनों रोते ही रहोगे या आकाश और पाताल की सैर भी करोगे?"
यह सुनकर सुलतान और सुलेमान के साथ साथ पीलू और खीलू भी जोरो से हँस पड़े
I भूरी बोली-" मैं तो सुलतान के साथ ही जाऊंगी और यह कहते हुए वो कूदकर
सुलतान के कंधे पर बैठ गई I
सुलतान ने हँसते हुए भूरी के सर पर हाथ फेरा और एक मोती अपने मुहँ में रख
लिया I पलक झपकते ही सुलतान आसमान में था I
आसमान में उस समय सैकड़ों तारे टिमटिमा रहे थे और सफ़ेद चाँद dudhiya
चांदनी में नहाया हुआ अपनी शीतलता बिखेर रहा था I भूरी होंठों पर अपनी
ज़ुबान फिराती हुई बोली-" चाँद तो मुझे दूध का भरा हुआ कटोरा लग रहा हैं
I" हाहाहा ..कहकर सुलतान जोरो से हँस पड़ा I
हाहाहा...कहीं पास से बिलकुल उसके जैसे हँसने की आवाज़ आई
"ये कौन हँसा" ..सुलतान चौंकते हुए बोला
"अरे !  कोई हँसा नहीं , बल्कि कोई तुम्हारी नक़ल उतार रहा हैं I" भूरी
इधर उधर देखते हुए बोली
" कौन हैं यहाँ पर ?" सुलतान ने जोर से पूछा
इधर-उधर" देखने की क्या जरुरत हैं, जब मैं तुम्हारे सामने ही बैठा हूँ I"
सुलतान और भूरी ने बड़े ध्यान से चारों ओर देखा और कहा  -" सामने आओ
हमारे..कहाँ से छिपकर बोल रहे हो?
"अरे! , मैं भला क्यों छुपने लगा ?" मैं तो  ठीक तुम्हारे सामने बैठा हूँ I
गुस्से में सुलतान कुछ बोलने ही जा रहा था कि तभी उसने देखा आवाज़ उसके
सामने पड़े हुए पत्थर से आ रही थी I
भूरी डर कर बोली-" अरे , इस पत्थर का तो मुहँ भी हैं I आँखें तो देखो
जरा, कैसी गोल गोल नचा रहा हैं ?"
सुलतान यह देखकर जरा सा पीछे हटा तो पत्थर बोला-" मुझसे डरो मत I मैं तो
अकेला रहते रहते बहुत बोर हो गया था I पहली बार किसी को यहाँ आसमान में
देखा इसलिए तुमसे थोड़ा सा मज़ाक कर लिया I
सुलतान बोला-" ओह..हम तो बेकार ही तुमसे डर गए I तुम तो बहुत अच्छे हो I "
" हाँ और मैं बहुत सारे  जादू भी जानता हूँ I "
-" क्या तुम्हे पता हैं कि मेरे अन्दर से पानी निकलता हैं ?"
तुम  तो इतने बड़े विशालकाय पत्थर हो भला तुम्हारे अन्दर से पानी कैसे निकल सकता हैं
.अरे, मैं रात को रूई बन जाता हूँ और ये कहते ही वो चट्टान का पत्थर कमर
मटका मटका के नाचने लगा
कभी वो इधर लुढ़कता तो कभी उधर... कई बार तो एक ही जगह पर वो गोल गोल
घूमता और अचानक ही सुलतान की चीख निकल गई जब उसने देखा कि पत्थर का गोल
मटोल चेहरा बन गया I सुलतान ख़ुशी से चीखा-" मैंने पहली बार किसी पत्थर को
ज़िंदा होते देखा हैं "
हाँ, पर ये बात तुम सिर्फ अपने तक ही रखना वरना लोग मुझे मुझे यहाँ से
उठाकर ले जाएंगे और क्या कहते हैं उस जगह को..कहते हुए पत्थर अपने नन्हे
नन्हें  हाथों से अपना चमकीला माथा खुजलाने लगा
सुलतान ख़ुशी से उछलता  हुआ बोला -" संग्रहालय"
वहां  पर नायाब  वस्तुएँ जो रखी जाती हैं और तुम जैसा बोलने हँसने गाने
और नाचने वाला पत्थर तो इस पूरे संसार में कहीं भी नहीं होगा I
ये सुनकर पत्थर  सुलतान के पास अपने नन्हे नन्हे डग भरता हुआ आया और बोला
-" पर मैं तो तुम्हारा दोस्त हूँ ना , क्या तुम अपने सबसे अच्छे दोस्त को
एक शीशे में कैद करके रखने दोगे ?
सुलतान की आँखों में ये देखकर आँसूं आ गए और वो पत्थर को कस कर गले लगाता
 हुआ बोला -" कभी नहीं कभी नहीं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा I
मैं किसी को नहीं बताऊँगा  I"
ये सुनकर पत्थर बोला  -" अब इसी ख़ुशी में मैं तुम्हे एक बढ़िया नाच दिखाता
हूँ , चलो जल्दी से अब  गाना गाना शुरू करो I"
और ये सुनकर दोनों जोर से हंस पड़े और सुलतान ने अपनी बांसुरी निकालकर  एक
बड़ी ही प्यारी धुन बजाई जिस पर पत्थर मटकता रहा ...मटकता रहा और कब शाम
हो गई दोनों जान ही नहीं पाए जब आसमान में खबसूरत चंद्रमा सैकड़ों  तारों
के साथ अठखेलिया करते हुए आया तो ऐसा लगा मानों नीले तारों से सजी हुई
तारों की बुनी ओढ़नी को किसी ने आसमान में उढ़ा दिया हो I

अरे, वो चाँद तो देखो..कितना सुन्दर चमक रहा हैं जैसे चांदी का कोई गोल
कटोरा हो...सुलतान  चाँद को एकटक निहारता हुआ बोला ......
पता हैं , रात को सपने में , मैं हमेशा सोचा करता था कि  मैं कभी चाँद से
मिलू तो उसे बताऊ कि मैं उसे कितना प्यार करता हूँ ..सुलतान बच्चों की
तरह खिलखिलाता हुआ बोला
अच्छा ये, बात हैं, तो अपनी आँखें बंद करो..पत्थर ने मुस्कुराते बड़े ही
दुलार से कहा
सुलतान ने सोचा कि पत्थर अब कोई नया खेल खेलने वाला है इसलिए उसने आँखें
कस कर मींच ली
तभी पत्थर बोला -  अब तुम अपनी आँखें खोल कर देखो एक ऐसा नज़ारा जो कभी
किसी ने नहीं देखा होगा I
ओह, ये मैं क्या देख रहा हूँ कहते हुए सुलतान ने अपने आपको हलकी सी चपत लगाई I
मैं ही हूँ तुम्हारे बचपन का दोस्त..कहते हुए सामने खड़ा सफ़ेद दूधिया
रौशनी में नहाया हुआ चाँद हँसते हुए बोला
सुलतान की आँखों में ख़ुशी के आँसूं आ गए I उसके होंठ थर्राने लगे I जब
उसके कुछ भी समझ में नहीं आया तो वो दौड़कर चंद्रमा के गले लग गया और
तुरंत झटके से अलग होते हुए बोला -" तुम तो बहुत ही ठन्डे हो I
हाहहाहा..ये सुनकर चाँद जोरो से हँसा
सुलतान बोला - " मुझे भी आसमान की सैर करवाओ न ...
ये सुनकर चाँद ने हँसते हुए कहा -" हाँ, हाँ, क्यों नहीं ,आखिर तुम तो अब
मेरे दोस्त हो पर सुबह होने के पहले मैं तुम्हे वापस धरती पर छोड़ दूंगा
तुम तो जानते ही हो जब सूरज आ जाएगा तो मुझे रज़ाई में दुबक कर सोना पड़ेगा
मंजूर..कहता हुआ सुलतान पत्थर से बोला " तुम भी हमारे साथ चलो"
नहीं, नहीं ,मेरा मन तो नाचने को कर रहा हैं I तुम ही सैर कर आओ आसमान की....
सुलतान ये सुनकर हँसने लगा और पत्थर से विदा लेकर भूरी को लेकर  चाँद के
साथ आसमान की ओर उड़ चला जैसे जैसे सुलतान आसमान की ओर उड़ रहा था वैसे
वैसे धरती से दिखने वाले नन्हें टिमटिमाते सितारें उसे बहुत बड़े ओर
चमकदार नज़र आ रहे थे I भूरि बोली-" अगर हम यहाँ ना आते तो कभी पता ही
नहीं चलता कि सितारें इतने बड़े और चमकदार भी होते हैं I
चाँद ये सुनकर मुस्कुराया ओर हँसते हुए बोला- " वो देखो, मेरा महल आ गया I
सुलतान और भूरी ने महल की तरफ देखा तो कुछ देर के लिए तो वो पलकें झपकाना
ही भूल गए I दूधिया चाँदनी में नहाया हुआ सफ़ेद संगमरमर का महल हीरे और
मोतियों से जड़ा हुआ दूर दूर तक अपनी जगमगाहट बिखेर रहा था I
सुलतान और भूरि जैसे ही महल में पहुंचे उन्हें लगा कि उनके पैर नरम
मुलायम बादलों में धंस रहे हैं I चाँद बोला-" तुम अपनी जूतियां उतार दो,
फिर देखो तुम्हें कितना मज़ा आएगा I"
सुलतान ने यह सुनकर अपनी पन्नें जड़ित लाल जूतियां उतार कर एक ओर रख दी और
नंगे पैर चलने लगा I
पैर ज़मीन  पर रखते ही सुलतान बोला-" पता नहीं क्यों, मैं जितने भी कदम
ज़मीन पर रख रहा हूँ, मुझमे कोई ऊर्जा सी समाहित होती जा रही हैं I"
चाँद मुस्कुराकर बोला-" ये जादुई बादल हैं I इन पर पैर रखते ही तुम्हारी
थकावट उड़न छू हो जायेगी I मैं भी ..मैं भी..करते हुए भूरि सुलतान के कंधे
से कूद गई और नरम मुलायम बादलों पर ठुमक ठुमक कर चलने लगी
चाँद इतनी जोर से हँसा कि उसकी आँखों  से आँसू निकल पड़े I
हँसते-हँसते  उसके गाल हलके गुलाबी हो गए I
सुलतान की आँखों खुशी से चमक उठी I
वो हँसते हुए बोला-" अरे वाह , तुम तो गुलाब के फूल की तरह गुलाबी होते जा रहे हो
चाँद यह सुनकर चौंका  और फिर जोर-जोर से रोने लगा I
सुलतान ने घबराते हुए पूछा-" मैंने क्या कुछ गलत पूछ लिया किया ?"
नहीं नहीं...तुमने बिलकुल सही बात पूछी I
पता हैं मैं सालों बाद आज इतना हँसा हूँ और पता हैं मैं तुम्हें देखकर
इतना खुश क्यों हुआ था ?"
क्यों हुए थे, सुलतान से पहले भूरी  आश्चर्य  से बोली
क्योंकि तुम्हारी शक्ल बिलकुल मेरे दोस्त से मिलती हैं, जिसे सालों पहले
जादूगरियों की रानी  हुस्ना  ने कैद कर लिया था I
चाँद इतनी जोर से हँसा कि उसकी आँखों  से आँसू निकल पड़े I
हँसते-हँसते  उसके गाल हलके गुलाबी हो गए I
सुलतान और भूरी यह सुनकर हक्के  बक्के रह गए I
वो सोच भी नहीं सकते थे कि चाँद के साथ आने पर उन्हें सुलतान के दूसरे
हमशक्ल के बारे में पता चल जाएगा I
सुलतान ने हकलाते हुए पूछा - " क्या वो सच में बिलकुल मेरे जैसा दिखता  था ?"
हाँ, चलो महल के अंदर चलो, मैं तुम्हें दिखाता हूँ ..कहकर चाँद ख़ुशी से
उछलता कूदता महल के अंदर जाने लगा I
महल की खूबसूरती को शब्दों में बयान  ही नहीं किया जा सकता था I
जगह जगह चमकीली किरणों से टकराकर चारों तरफ दुशिया प्रकाश फ़ैल रहा था I
फव्वारों में से सतरंगी पानी निकल रहा था जिनसें  जल तरंग सा संगीत निकल रहा था I
चारों ओर सफ़ेद रंग के गुलाब खिले हुए थे, जिन पर नन्हें नन्हें तारें
बैठकर बातें कर रहे थे I
पर इन सब अद्भुत और खूबसूरत नज़ारों को देखने के बाद भी सुलतान का मन तो
केवल अपने हमशक्ल की पेंटिंग को देखने में ही लगा हुआ था I
जल्दी ही उसकी यह मुराद भी पूरी हो गई क्योंकि महल में घुसते ही सामने ही
 दीवार बराबर एक बहुत बड़ी पेंटिंग लगी हुई थीजिसमें चाँद और उसका
हमशक्ल एक दूसरे के हाथ में हाथ डाले खड़े होकर मुस्कुरा रहे थे I
सुलतान की आँखों में चमक आ गई I
वह लगभग दौड़ता हुआ उस तस्वीर के पास पहुंचा और बोला-" मैं लाऊंगा
तुम्हारे इस दोस्त को वापस, बस तुम मुझे इसके बारें में थोड़ा बता दो I "
चाँद उदास होते हुए बोला-" ये चंद्रपुर देश का राजा हैं I एक बार हम बाहर
 बगीचें में सितारों और किरणों के साथ खेल रहे थे कि तभी कहीं से एक
जादूगरनी आई और इसे अपने साथ उठा कर ले गई I
" हम सब उसके पीछे भागे पर वो अपने जादू से हमारी aanके सामने से पल भर
में ही ओझल हो गए .. और ये  कहते हुए चाँद की  आँखों से आँसूं टपक पड़े I
सुलतान ने आगे बढ़कर चाँद के आँसूं पोंछे और पूछा - " क्या तुम उस
जादूगरनी के बारें में जानते हो? "
हाँ, यहाँ से दक्षिण दिशा में एक टापू हैं जो बिलकुल निर्जन हैं और उस पर
कोई आता जाता नहीं हैं I
वो वहीँ पर रहती हैं I
तो अगर तुम्हें पता हैं कि तुम्हारा दोस्त वहाँ पर कैद हैं तो तुम जाकर
उसे छुड़ाते क्यों नहीं ? " सुलतान ने थोड़ा सा नाराज़ होते हुए पूछा
वो चुड़ैल जब यहाँ  से मेरे दोस्त हर्ष को ले जा रही थी तो वो चिल्ला
चिल्ला कर कह रही थी कि तुम्हारे दोस्त को अगर कोई व्यक्ति छुड़ा सकता हैं
तो वो सुलतान हैं , उसके अलावा जो कोई भी इसे मेरे पास से ले जाने के
कोशिश करेगा  वो मारा जाएगा ?"
सुलतान अचंभित होते हुए बोला-" तो क्या तुमने इसी लिए हर्ष को नहीं
छुड़ाने की  कोशिश नहीं करी  ?"
कोशिश क्यों नहीं करी  मेरे दोस्त, पर जितने भी सैनिक उसे बचाने के लिए
गए, वो आज तक वापस नहीं लौटे I
पता नहीं उस दुष्ट जादूगरनी ने उन्हें बंदी बना लिया हैं या फिर मार डाला
हैं I " कहते हुए चाँद रो पड़ा सुलतान उसके पास आकर उसे ढाँढस बंधाता हुआ
बोला-" मेरा ही नाम सुलतान हैं I " क्या..चाँद ने आश्चर्य से लगभग ख़ुशी
से उछलते हुए कहा
 हाँ..और पता हैं ..ये सब तो सुलतान को पहले ही सपने में आ चुका है
...भूरी नरम बादलों में कूदते हुए बोली
चाँद का चेहरा ख़ुशी से दमदमा उठा I
उसने सुलतान  का हाथ पकड़ते हुए पूछा-" तो क्या सच में तुम मेरे दोस्त
हर्ष को उस जादूगरनी की कैद से आज़ाद करा दोगे?"
हाँ.. मेरे कुछ दोस्त है जो हमेशा मेरे साथ रहते हैं, पर वो लोग इस समय
पाताल लोक गए हुए हैं I " तुम उनकी बिलकुल चिंता मत करो, वो अगर यहाँ
आएंगे तो में उन्हें अपने महल में बहुत आराम से रखूँगा I " चाँद बड़े ही
प्यार से सुलतान से बोला
ठीक हैं , तो मैं कल सुबह ही भूरी के साथ मेरे हमशक्ल राजा और तुम्हारे
दोस्त को छुड़ाने के लिए निकल पडूंगा I
सुलतान का ये वाक्य खत्म होने से पहले ही वहाँ धम -धम की आवाज़ें आने लगी I
सबने उस तरफ़  देखा तो सबकी आँखें आश्चर्य से फ़ैल गई  I
सुलतान का दोस्त पत्थर बड़े आराम से चला रहा था I
तुम यहाँ कैसे..सुलतान ने आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी से पूछा
तुम्हारी बहुत याद आ रही थी इसलिए मैं आ गया...पत्थर हँसते हुए बोला

फिर वो चाँद से बोला-" मुझे जल्दी से चलकर किसी कमरे में लेटा दो वरना
थोड़ी और रात होते ही मैं बर्फ़  का बन जाऊँगा I
तो तुम क्या पिघलते नहीं हो ..भूरी ने उसके पास जाकर पूछा
 ना ..कभी नहीं ..मैं  सिर्फ़ बर्फ बन जाता  हूँ I
 पता  हैं मेरे बर्फ़  बनने  के बाद जब मैं पिघलना शुरू होता  हूँ  तो मैं
कोई पानी बनकर बह थोड़ी ना जाता   हूँ ..पत्थर इतराता   हुआ बोला
फ़िर..फ़िर  क्या हो जाते  हो तुम  ..सुल्तान  ने उसे हैरानी  से  देखते हुए पूछा
ये सुनकर पत्थर जोरो से हँसा और थोड़ा सा इतराता हुआ बोला-" मेरे पानी से
नन्हें नन्हें बर्फ़ के पुतले बन जाते हैं जो चल फिर सकते हैं, हँस सकते
हैं , मेरी तरह मटक मटक कर नाच सकते हैं और उन्हें जो भी कहो वो कर सकते
हैं....
फ़िर जैसे ही सूरज की पहली किरण मुझ पर पड़ती हैं, वो नन्हें सैनिक  मुझमें
 एक- एक  करके  समाहित  हो जाते हैं और मैं फिर से विशालकाय पत्थर बन
जाता हूँ I
मुझे तो मजा ही आ जाएगा ..अच्छा हुआ मैं सुलतान के साथ उसके हमशक्ल राजा
को ढूँढने आ गई वरना ऐसी अद्भुत बातें ना तो मैं कभी देख पाती  और ना ही
सुन  पाती ..भूरी ख़ुशी से उछलते हुए   बोली
 हाँ, पत्थर बोला...चलो अब जल्दी से मुझे सब हमशक्ल राजा वाली कहानी बताओ
और कल सुबह   सुलतान के साथ मैं भी जाऊँगा  I "
ठीक   हैं कहते हुए चाँद ने रौशनी की एक किरण को बुलाया और उसे पत्थर को
एक कमरे  मैं भिजवाने को बोला


उसके बाद चाँद बोला-"  मेरे पास  एक ऐसा फ़ूल हैं जिसे अगर किसी ने सूंघ
लिया तो वो फिर हँसता  ही चला जाएगा I सुलतान चाँद का इतना प्यार देखकर
गद्गद  हो उठा I वो बोला-" तुम्हारे इस अनमोल तोहफ़े के लिए  मैं तुम्हारा
शुक्रगुज़ार हूँ I
चाँद मुस्कुराता हुआ बोला-" मेरे पास तुम्हें देने  के लिए  एक और उपहार हैं I
क्या हैं, जल्दी से बताओ
आओ मेरे साथ कहते हुए चाँद उन्हें एक कमरे में ले गया उस  कमरे में ढेर
सारे वाद्ध यन्त्र रखे हुए थे सितार, तबला, ढोलक, हारमोनियम, जलतरंग ,
बासुरीं और भी ना जाने क्या क्या... अरे वाह..लगता हैं तुम्हें संगीत का
बहुत शौक हैं, सुलतान ने एक बाँसुरी को अपने  हाथ में उठाते हुए पूछा
हाँ, बस यह समझ लो  I हर्ष के जाने के बाद ये सभी मेरी संगी साथी  हैं I
मैं तुम्हें यह बासुँरी उपहार में देना चाहता हूँ  I पर जब मैं हर्ष को
छुड़ाकर लाऊंगा , तब  ही मेरे पास समय होगा इसे बजाने  का, अभी  मैं  इसे
ले जा  कर क्या करूँगा  I इस बांसुरी के बारे में तुम अभी जानते ही कहाँ
हो, वरना कभी भी ऐसा नहीं कहते
अच्छा तो क्या ये नाचती हैं मेरी तरह..और क्या ये बोल भी सकती है मेरे जैसे..
हाँ..क्यों नहीं ये जादुई बासुँरी है .चाँद बोला
ये जो चाहे वो कर सकती है बस इसे हमेशा संभाल कर रखना पड़ता हैं, क्योंकि
अगर ये जरा सा भी टूट जाए तो फिर ये बिलकुल बेकार हो जायेगी
सुलतान की समझ में कुछ भी नहीं आया उसने चाँद से पूछा-" ये क्या क्या कर
सकती हैं?" चाँद ने बांसुरी को जमीन पर रखा  और बोला-" प्रिया बांसुरी ,
मैं चाहता हूँ  कि  इस समय तुम सुलतान के सौ हमशक्ल आदमी बना कर यहाँ पर
खड़े कर दो ...बांसुरी से एक बहुत ही मधुर और सुरीली आवाज़ बोली
" अभी लो..." और पल भर में ही उस विशाल कक्ष में सुलतान के सौ हमशक्ल खड़े हो गए I
सुलतान और भूरी के साथ साथ पत्थर भी ये देखकर आश्चर्यचकित  हो गया और
ख़ुशी से चीखते हुए बोला-" ऐसा लग रहा हैं कि सुलतान शीशा देख रहा हैं
चाँद ने हँसते हुए ताली बजाई और पल भर में ही सभी आदमी गायब हो गए I
चाँद बोला-" तुम जो भी कहोगे ये बांसुरी करेगी, पर इसे पहले ज़मीन पर रखना होगा I "
सुलतान ने खुश होते हुए चाँद को गले से लगा लिया और बोला-" मैं सूरज की
पहली किरण के साथ ही हर्ष को ढूंढने निकल जाऊँगा I "
चाँद बोला-" हाँ , अब तुम सब जाकर अपने कक्ष में आराम कर लो I
भूरी कूदकर सुलतान के आगे आगे चल दी और पत्थर भी अपने कमरे की ओर बढ़ गया I

रात बीतती जा रही थी पर सुलतान की आँखों में नींद नहीं थी वो जैसे हर
बीतते पल के साथ अपने हमशक्ल राजा हर्ष को ढूढ़ने के लिए बैचेन हो रहा था
I उसने बांसुरी को ज़मीन  पर रखा और कहा-" मेरे दोस्त सुलेमान, पीलू और
खीलू को मेरे पास ले आओ I "
बांसुरी से सुरीली आवाज़ आई-" हाँ, अभी लो.." और सुलतान के पलक झपकते  ही
वहाँ  पर सुलेमान, पीलू और खीलू के साथ खड़ा था I
सुलेमान को देखते ही सुलतान दौड़कर  उसके गले लग गया और भूरी उछलकर
सुलेमान के कंधे पर जा बैठी I पीलू और खीलू भी सुलतान के गले  लग गए I
पीलू  बोला-" अब हमें जो भी करना  होगा हम साथ में ही मिलकर करेंगे I अब
में आपके  कहने से भी अलग नहीं होऊंगा आपसे I
खीलू बोला-" हाँ, पीलू बिलकुल सही  कह  रहा   हैं I
तुम्हारे  और भूरी के बिना  तो हमारा  रो  रो  कर  बुरा  हाल था और
सुलेमान ने तो कल से कुछ  खाया  भी नहीं हैं I
सुलेमान का इतना प्रेम देखकर सुलतान की आँखों  से आँसूं  निकल  पड़े और वो
बोला-" अब हममें  से कोई  कभी भी नहीं अलग होगा और अभी हम सब मिलकर
स्वादिष्ट भोजन  करेंगे I"
भूरी बोली-" मुझे  ढेर सारे काजू  किशमिश वाली खीर खानी हैं I भूरी को
होठों पर जीभ फेरते देखकर कमरे  में हँसी का फव्वारा फूट गया
सुलतान ने बाँसुरी से कहा-" बहुत ही स्वादिष्ट खाना ले आओ और हाँ, खीर तो
ढेर सारी होनी चाहिए बांसुरी बोली-" हाँ..हाँ....क्यों नहीं" और देखते
ही देखते सारा महल खाने की खुशबु से महक उठा I ढेर सारे लज़ीज़ व्यंजन
देखकर सुलतान और सुलेमान सहित पीलू और खीलु के मुहं में भी पानी आ गया और
वे सब खाने पर टूट पड़े I
भूरी की तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था I
वो बड़े मजे से चटखारे लेकर खीर के बड़े बड़े बर्तनों के पास ही बैठ गई थी
और बड़े आराम से खीर खा रही थी I
सब बहुत खुश थे और अपने अपने अनुभव साझा कर रहे थे I
हँसी ठहाकों के बीच कब सूरज की पहली किरण ने महल पर दस्तक दी, ये सिवा
भूरी के कोई जान ही ना पाया जो खिड़की से बाहर ही देख रही थी I
अरे , सूरज आ गया..भूरी ख़ुशी से उछलते हुए बोली
सलमान और सुलतान ने एक दूसरे की तरफ देखा और निकलने की तैयारी करने लगे I
तभी सबने देखा कि पत्थर भी लुढ़कता हुआ उनकी ओर चला आ रहा था I
सुलेमान उसकी तरफ देखकर मुस्कुराता हुआ बोला-" तो यही हैं, हमारा नया
दोस्त..I. हाँ, मैं ही हूँ और तुम हो सुलेमान ओर ये दोनों हैं पीलू
खीलू..
पीलू बोला-" तुम्हें हमारे बारे में इतना सब कैसे पता है ये जो
तुम्हारा दोस्त हैं ना सुलतान, इसने तुम्हारे बारें में इतना बताया हैं
कई अगर मैं आँख भी बंद कर लेता तो तुम सबको पहचान जाता
सुलेमान बोला-" क्या हम लोगो को चाँद से नहीं मिलवाओगे I
नहीं, उसने कहा था कि सूरज की रौशनी में उसे सब कुछ धुंधला दिखाई देता
हैं इसलिए वो रात में ही आकर मुझसे मिल गया था I
अच्छा..तो चलो अब हमें कहाँ चलना हैं..सुलेमान ने पूछा
चाँद ने मुझे रास्ता बताया हैं..तुम सब मेरे पीछे पीछे आ जाना कहते हुए
सुलतान ने फ़तेह को पुकारा तो बिजली की गति से फ़तेह वहाँ पहुँच गया और
सुलतान को देखकर खुशी से हिनहिनाने लगा सुलतान ने प्यार से फ़तेह के सर
पर हाथ फेरा और उसके ऊपर बैठकर बोला- यहाँ से दक्षिण दिशा में एक टापू
हैं जो बिलकुल निर्जन हैं, हमें वहीँ पर जाना हैं
नहीं, नहीं..अब बातचीत में बिलकुल समय नहीं खराब करो - भूरी गुस्से से
फ़तेह के ऊपर बैठते हुए बोली
हाँ, चलो..कहते हुए सुलतान ने घोड़े को एड़ लगाई और देखते ही देखते फ़तेह
जैसे हवा से बातें करने लगा
पीलू और खीलू भी सुलेमान को अपने कंधे पर बैठकर सुलतान के पीछे पीछे उड़
चले कई दिन और कई रातें लगातार चलने के बाद उन्हें विशाल नीले समंदर के
बीचो बीच एक विचित्र तरह का चौकौर टापू दिखा जिस पर हज़ारों पत्थरों से
बानी हुई आदमी और जानवरों की मूर्तियाँ थी I
सुलेमान आश्चर्य से उस विचित्र टापू को देखता हुआ बोला-" लग रहा हैं कि
यह उसी दुष्ट जादूगरनी का टापू हैं I फिर कुछ सोचकर वो बोला-" तुम धीरे
धीरे नीचे उतरों और इस टापू पर चलो  I
फ़तेह यह सुनकर हिनहिनाया मानों वो सुलतान की बात से बिलकुल सहमत हो और वह
आराम से टापू पर उतर गया I
पर जैसे ही फ़तेह ने अपने पैर जमीन पर रखे, वो तुरंत पत्थर का बन गया I
सुलतान यह देखकर जोरो से चीखा और पीछे देखकर चिल्लाया-" सुलेमान, इस टापू
पर मत उतरना फ़तेह यहाँ पर पैर रखते ही पत्थर का बन गया I
उसकी बात सुनकर पीलू और खीलू हवा में ही रूक गए और पीलू के कँधे पर बैठा
सुलेमान जोर से बोला-" पर अब हम क्या करेंगे
उधर सुलतान का कलेजा फ़तेह को पत्थर का बना देखकर बैठा जा रहा था I
वो फूट-फूट कर रोने लगा और फ़तेह को प्यार से सहलाने लगा I तभी भूरी
बोली-" तो ये सब इतनी ये सारी आदमी और जानवरों की मूर्तियाँ नहीं हैं,
बल्कि ये सब भी इस टापू पर पैर रखते ही पत्थर के बन गए होंगे I "
सुलतान भूरी की ये बात सुनकर जैसे नींद से जागा और बुदबुदाया-" ये
जादूगरनी तो सच में बहुत दुष्ट हैं I"
तब तक उड़ते हुए पीलू बोला-" पर अब हम लोग क्या करे I
बिना इस टापू पर उतरे हम हर्ष को उस जादूगरनी की कैद से कैसे छुड़ा पाएँगे?"
सुलेमान बोला-" तुम लोग बिलकुल चिंता मत करो I मैं कुछ सोचता हूँ I"
और तभी अचानक वो ख़ुशी से उछल पड़ा और उसने अपनी जेब से बाँसुरी को निकालकर
अपने हाथों में पकड़ते हुए कहा-" प्रिय बाँसुरी, हम चाहते हैं कि जब हम इस
ज़मीन  पर उतरे तो हम पत्थर के ना बने और हमारा फ़तेह भी वापस अपने असली
रूप में आ जाए I "
कुछ ही पलों बाद बाँसुरी से बहुत ही मधुर आवाज़ आई-" फ़तेह तो वापस अपने
असली रूप में तब तक नहीं आ सकता जब तक तुम इस जादूगरनी का तिलिस्म तोड़
नहीं देते पर मैं तुम्हें सबको मोतियों की माला दे रही हूँ जिसे पहनने के
बाद तुम लोग पत्थर के नहीं बनोगे I"
और फिर बाँसुरी से एक-एक करके माला निकालने लगी जिसे सभी लोगो ने पहन
लिया I भूरी को तो हर समय मजाक सूझता था वो माला देखते हुए बोली-" क्या
मुझे दही के कटोरों की माला मिल सकती हैं ?
और यह कहकर उसने सब तरफ देखा और जब तक सुलतान उसे रोकता वो फटाक से ज़मीन
पर कूद गई I
पल भर के लिए तो जैसे सबकी साँसें अटक गई पर भूरी को आराम से चलता देखकर
सबने चैन की साँस ली और फिर वो भी ज़मीन पर उतर गए I
वे जब आगे बढ़े तो उन्होंने देखा कि सामने एक झोपड़ी नुमा छोटा सा मकान बना हुआ हैं I
उस घर के दरवाजे पर दो बहुत छोटे छोटे सफ़ेद नगीने चमक रहे थे I भूरी
दौड़कर उन नगीनों के पास पहुँची और जैसी ही उसे उठाने के लिए उसके पास गई,
सुलेमान चिल्लाया-" भूरी, यहाँ किसी भी चीज को छूना मत, वरना हम सब
मुसीबत में पड़ जाएँगे I
वे सब उस झोपडी के अंदर दाखिल हुए I
वहाँ पर ना जाने कितनी काली-काली चमगादड़ उलटी लटकी हुई थी, जिन्हें देखकर
डर  के मारे सिरहन पैदा हो रही थी और जगह जगह पर बड़े बड़े जाले थे, जिनमें
आदमकद मकड़ियाँ जालें बुन रही थी I
पीलू बोला-" हमें यहाँ से चलना चाहिए, ऐसा लग रहा हैं कि हम गलत जगह आ गए हैं I"
पर सुलतान जानता था कि ये सब उस जादूगरनी का रचा हुआ आँखों का एक धोखा
हैं ताकि सभी लोग समझे कि ये स्थान बिलकुल वीरान पड़ा हैं और कोई भी इस
मकान के अंदर जाने की कोशिश ना करे I
सुलतान और सुलेमान अपनी बड़ी -बड़ी चमकती हुई तलवारों से मकड़ियों के जालो
को काटते हुए आगे बढ़े जा रहे थे I
तभी सुलतान का पैर किसी वस्तु से टकराया और उसे देखकर डर के मारे सुलतान
की चीख निकल गई
वह जोर से चिल्लाया-" इधर देखो I " जैसे ही सबने उस तरफ देखा , सब सन्न रह गए I
ये एक आदमी का चेहरा था जिसकी आँखें खुल और बंद हो रही थी और उसके सर पर
एक छोटी सी चोटी बनी हुई थी I
उसका धड़ जमीन के अंदर था और वो सबको गर्दन घुमा घुमा कर देख रहा था I
कौन हो तुम ..सुलतान ने हिम्मत करते हुए पूछा
ये सुनकर उस चेहरे ने जोरदार ठहाका लगाया और जवाब दिया-" मैं एक जिन्न  हूँ I
मेरे पास बहुत सारी जादुई ताकत थी जिससे मैं लोगो का भला करता था I
पर इस बूढी  जादूगरनी ने बरसों मेरी बहुत सेवा की, जिससे मैंने एक दिन
बातों ही बातों में उसे बता दिया कि मेरे पास एक जादू का कटोरा हैं, और
मैं उससे जो चाहूँ वो हो सकता हैं I"
फिर, तो आगे क्या हुआ..सुलतान ने उत्सुकता से पूछा
तो एक रात मेरे सोने के बाद चुपचाप उस जगह से जाकर वो जादू का कटोरा
निकाल लिया और मुझे आधा जमीन के अंदर यहीं पर गाड़ कर छोड़ दिया I "
और यह कहते हुए उस जिन्न की आँखों से आँसूं बहने लगे I
सुलतान और सुलेमान की आँखें भी भर आई I
सुलेमान ने आगे बढ़कर उसके आँसूं पोंछते हुए कहा-" तुम बिलकुल भी परेशान मत हो I
हम उस दुष्ट जादूगरनी को खत्म करने के लिए ही यहाँ  पर आए हैं I तुम बस
इतना बता दो कि वो जादू का कटोरा हमें कहाँ मिलेगा ?"
जिन्न ने साँस भरते हुए कहा-" उस कटोरे को हासिल करना इतना आसान नहीं हैं दोस्त I"
तुम बताओ तो सही, कि वो अपना कटोरा कहाँ रखती हैं ?"
जिन्न बोला-" वो कटोरा हमेशा उसके सर पर ही रहता हैं I "
पीलू खुश होते हुए बोला- अरे वाह,तब तो वो कटोरा बड़ी आसानी से लिया जा
सकता हैं, इसमें कौन सी मुश्किल हैं
आगे की बात भी सुन लो मेरी, जिन्न बोला
सुलतान ने पीलू को हाथ के इशारे से चुप रहने के लिए बोला और जिन्न से
पूछा-" उसके सर पर रहता हैं मतलब?"
वो जादू का कटोरा उसके सर पर रहता तो हमेशा हैं पर वो किसी को दिखाई नहीं देता I"
इतना कहकर जीन ने अपनी आखें बंद की और बोला-" तुम्हें जिस तरफ भी उस
जादूगरनी का सर हल्का सा झुका  हुआ दिखे तुम समझ जाना कि कटोरा उसी तरफ
हैं और फिर बड़ी ही सावधानी से तुम उसे ले लेना और अगर तुम उस कटोरे को एक
बार में नहीं ले पाये तो समझना कि तुम यहाँ से ज़िंदा वापस नहीं जा पाओगे
I"
और यह कहकर जिन्न ने अपनी आखें बंद कर ली और सुलतान के बहुत बार पुकारने
के बाद भी नहीं खोली
खीलू बोला-" हम जितना आसान समझ रहे थे, यहाँ तो उतना ही मुश्किल नज़र आ रहा हैं I"
सुलतान ने कहा-" अब हमें हर तरह से चौकस रहने की ज़रूरत हैं I
और यह कहकर वो मकड़ी के जले  काटता हुआ आगे बढ़ने लगा I
तभी उन्हें एक जगह से हंसने की आवाज़े आई I
उन्होंने उस ओर देखा तो वे यह देखकर आश्चर्य में पड़ गए कि एक बुढ़िया वहाँ
खड़े होकर लोगो से बगीचे की खुदाई करा रही हैं और जो भी जरा सी पीठ सीधी
करने के लिए खड़ा होता उसे कोड़े से मार रही हैं I
यह तो वही बूढी जादूगरनी हैं ...भूरी चिल्लाई
सुलतान ने उसके मुँह  पर हाथ रखकर उसे चुप कराया और वे सभी वहीँ पर खड़े हो गए I
थोड़ी देर बाद जब वो बुढ़िया उन लोगो को मारते मारते थक गई तो जोरो से
चीखते हुए बोली-" मैं जरा खाना खाने जा रही हूँ और अगर तुममें से किसी ने
भी काम रोका तो तुम्हारी ऐसी ही और पिटाई होगी I"
पर हमें भी बहुत जोरो से भूख लगी हैं, आपने हमें कल से खाने के लिए कुछ
नहीं दिया हैं - एक आदमी   ने डरते हुए धीरे से कहा
मेरे सामने बोलने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी..कहते हुए बुढ़िया ने पूरी
ताकत के साथ उस आदमी को कोड़ा मारा तो वो बेचारा ज़मीन पर गिर गया I
बुढ़िया यह देखकर जोरो से हँसी और आराम से ऐसे चल दी जैसे कुछ हुआ ही ना हो I
सुलतान और सुलेमान सहित पीलू, खीलू , भूरी और पत्थर का कलेजा भी ये
देखकर दहल गया और उनकी आँखों में आँसूं आ गए I
जब बुढ़िया उनकी आँखों से ओझल हो गई  तो वे सभी उन आदमियों के पास पहुँचे I
उन सभी के शरीरों पर बस नाम मात्र के कपड़े थे और वे सभी बिलकुल कंकाल लग
रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें कई दिनों से खाना ना मिला हो I
उन सभी के शरीरों से जगह जगह से खून रिस रहा था I
सुलतान और उसके साथियों को देखकर वे डर से काँपने लगे और उनमें से एक
आदमी बोला-" हमें मत मारों मत मारों हमें..हमें खाना नहीं चाहिए I "
सुलतान का मन ये देखकर इतना द्रवित हो गया कि वो जोरो से रो पड़ा और अपने
आँसूं पोंछते हुए बोला-" अब बुढ़िया या उसके साथी कितनी देर बाद आएंगे ?"
अब वो सभी रात को आएंगे हमारा काम देखने के लिए I"
ये तो बड़ी अच्छी बात हैं, कहकर सुलतान ने मुस्कुराते हुए अपनी बाँसुरी
निकाली और बोला-" प्रिय बाँसुरी, यहाँ पर जितने भी लोग हैं उन सभी के लिए
स्वादिष्ट पकवानों से भरी थाली लेकर आओ I" बाँसुरी से यह कहते ही वहाँ
पकवानों के थाल सज गए सामने इतना सारा खाना देखकर वे सभी हक्के बक्के रह
गए और  खाने की तरफ ललचाई नज़रों से देखने लगे I
सुलेमान ने आगे बढ़कर कहा-" तुम सब आराम से पेट भरकर खाना खाओ I हम सब
तुम्हारे दोस्त हैं और तुम्हें इस जादूगरनी के चंगुल से मुक्त कराने के
लिए आए हैं I
सुलेमान के यह कहते ही सब जैसे खाने पर टूट पड़े और मिनटों में ही सारा
खाना चट कर गए I सुलतान का उन लोगों को इस तरह से खाते देखकर दिल भर आया
I
जब सब लोग भरपेट खाना खा चुके तो उनमें से एक आदमी बोला-" अगर तुम लोगों
को जादूगरनी हुस्ना ने देख लिया तो वो तुम लोगो को भी हमारी तरह यहाँ
हमेशा के लिए कैद करके रख लेगी और दिन रात भूखे पेट काम करवाएगी I"
भूरि उचकते हुए बोली-" अब तुम्हारी हुस्ना  के काम करने के दिन आ गए हैं I "
सुलतान ने भूरी की तरफ मुस्कुराकर देखा और पूछा -" यहाँ  से अंदर हुस्ना
के महल के अंदर जाने का रास्ता कौन सा हैं ?
वो आदमी बोला-" वो जो सामने चूहे के बिल जितना छेद दिखाई दे रहा हैं ना,
वहीँ से अंदर जाती हैं वो I”

पीलू घबराते हुए बोला-" पर उसमे तो मेरा अंगूठा भी नहीं जाएगा तो हुस्न
भला  कैसे जाती होगी ?" तभी वहाँ खड़ा दूसरा आदमी बोला-" दरअसल वहीँ पर
तुम्हें एक बहुत विशाल छिपकली बैठी हुई दिखाई देगी जो महल के बराबर ऊँची
हैं , वो महल की द्वारपाल हैं I
तो वो तो हमें खा जायेगी
सुलेमान ने थूक गटकते हुए पूछा
नहीं, वो तुमसे पूछेगी कि उसे खाने मैं क्या पसंद हैं, और तुम बता देना -"किशमिश"
फ़िर वो तुमसे किशमिश मांगेंगी तो तुम उसको दे देना I हुस्ना हमारी ही तरह
उस को भी हमेशा भूखा रखती हैं ताकि वो सभी आदमियों को एक एक करके खा ले I
उन्हीं में से एक तीसरा आदमी बोला-" पर अगर उस छिपकली  को किशमिश मिल जाए
तो वो बहुत खुश हो जायेगी और तुम्हें जाने देगी I"
यह सुनते ही सुलतान सहित सभी के चेहरों पर मुस्कान फ़ैल गई और वो जैसे ही
आगे बढ़ने को हुए तो भूरी बोली-" इन बर्तनों को तो गायब करो सुलतान, वरना
हुस्ना इन सबके साथ साथ हमारी भी चटनी बना देगी I"
सभी भूरि की इतनी समझदारी भरी बात सुनकर दंग  रह गए I
खीलू बोला-" अगर मेरे पास काल  टीका होता तो मैं तुम्हारे इस भूरे से
प्यारे चेहरे पर लगा देता I"
यह सुनकर सभी जोरो से हँस पड़े जिनमें वो सभी आदमी भी थे जो वहाँ कैदी थे I
सुलतान ने बड़े ही प्यार से उनकी तरफ देखते हुए कहा-" अब तुम सब हमेशा ऐसे
ही हँसते रहोगे I"
यह सुनकर सभी के चेहरों पर मुस्कान तैर गई और उन में से एक आदमी बोला-"
आपको भगवान् आपके इस मकसद में कामयाब करे I"
सुलतान ने यह सुनकर कहा-" आमीन " और वो अपने दोस्तों के साथ उस छोटे से
बिल की ओर चल पड़ा I
वो विशाल छिपकली तो दिखाई ही नहीं दे रही हैं I " जरा ऊपर तो देखो..बहुत
जोर से आवाज़ आई सबको ऐसा लगा कि मानों आकाश से बिजली चमक रही हो और उनके
कान के परदे फ़ट जाएँगे I उन्होंने कानों में ऊँगली डालते हुए ऊपर की ओर
देखा तो करीब दस फुट की भीमकाय छिपकली खड़ी हुई ,उनकी ओर लाल लाल आखों से
देख रही थी I
पत्थर तो डर के मारे लुड़क ही उठा I
पीलू ने दौड़कर पत्थर को सीधा खड़ा किया I
छिपकली ने पूछा -" तुम लोग कौन हो और बिना पत्थर के बने यहाँ तक कैसे पहुँच गए ?"
सुलेमान धीरे से सुलतान के कानों में बोला-" यहाँ तो प्रश्न ही गड़बड़ हैं
I उस आदमी ने तो कहा था कि ये  खाने के बारे में पूछेगी सुलेमान को
सुलतान के कानों में खुसुर-पुसुर करते देखकर छिपकली बोली-" मुझे बहुत भूख
लगी हैं, और मज़बूरी में मुझे तुममें से किसी एक को खाना ही पड़ेगा I"
                 क्या तुम्हें इंसानों को खाना अच्छा लगता हैं ?" पत्थर
ने सुलतान के पीछे छुपते  हुए डरते हुए बोला
नहीं, इंसानों को तो मैं मज़बूरी में खाती हूँ I"
मेरी मनपसंद चीज़ तो कुछ ओर ही हैं I
सुलतान ने अनजान बनते हुए पुछा-" तुम्हें क्या पसंद हाँ दोस्त ? मुझे
मीठी मीठी किशमिश बहुत पसंद हैं ..छिपकली अपने होंठों  पे ज़ुबान  फिराते
हुए बोली
अगर हम तुम्हें किशमिश खाने को दे तो क्या तुम हमारी दोस्त बनोगी -
सुलेमान ने प्यार से पूछा
हाँ हाँ, क्यों नहीं...अगर तुम मुझे किशमिश दोगे तो एक चमत्कार भी होगा -
छिपकली ने जवाब दिया सुलतान ने बाँसुरी को अपने हाथों में लेते हुए कहा-"
एक बहुत बड़े बर्तन में किशमिश भर दो ओर वो बर्तन कभी भी किशमिश से खाली
ना  हो I "
और पल भर के अंदर ही वहां एक बहुत बड़ा बर्तन किशमिश से भरा हुआ आ गया
जिसे देखकर छिपकली ख़ुशी के मरे ताली बजने लगी I
जैसे ही छिपकली ने एक मुट्ठी भरकर किशमिश अपने मुँह  में डाली वहाँ चारों
तरफ सफ़ेद कोहरे की  चादर बीच गई जिसमें किसी को कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था
I
सुलतान चिल्लाया -" ये इतना सारा धुआँ कहाँ से आ गया ?"
सुलेमान बोला-" शायद छिपकली ही हमें कैद करके ले जा रही हैं I
तभी एक सुरीली सी आवाज़ आई -" नहीं मेरे आका, आप लोगो ने मुझे हुस्ना के
जादू से आज़ाद कराया हैं, भला मैं आपको क्यों कैद करुँगी ?
अब तक सब कुछ हल्का हल्का दिखाई देने लगा था और  dhuan  बहुत तेजी से एक
बोतल के अंदर जा रहा था , जो उनके सामने खड़े एक सुन्दर से राजकुमार जैसे
दिखने वाले आदमी के हाथ में थी आये, तुम छिपकली से इतने सुन्दर
राजकुमार कैसे बन गए ?भूरी ने आखें मटकाते हुए पूछा राजकुमार बोला-" मैं
थन्जावुर राज्य का राजकुमार हूँ I
बहुत समय पहले मैं यहाँ अपने साथियों   के साथ घूमते हुए आ गया था बस तभी
इस दुष्ट जादूगरनी ने मुझे ओर मेरे दोस्तों  को कैद कर लिया I
मेरे आधे से ज्यादा सैनिकों को उनके घोड़ो सहित पत्थर का बना दिया I"
तो बहार  जितने मूर्तियां हैं वो तुम्हारे सैनिक हैं ..पत्थर ने अपने गोल
मटोल मुहं पर हाथ रखकर आश्चर्य से पूछा
हाँ..ओर जो बेचारे मार खा खा कर काम कर रहे हैं वो भी मेरे साथ के लोग हैं I
तो तुमको क्यों इतनी डरावनी छिपकली बनाकर छोड़ दिया और ये किशमिश खाते ही
तुम वापस अपने असली रूप में कैसे आ गए ?" सुलेमान ने उत्सुकता से पूछा
इस जादूगरनी ने पहले हम सबके साथ बड़ा प्यार भरा व्यवहार किया और बातों ही
बातों में मेरी मन पसंद खाने की चीज़ पूछी, जब मैंने इसे किशमिश बताई तो
ये बोली-" अब मैं तुम्हें इतनी डरावनी ओर बदसूरत छिपकली बनाऊँगी  कि लोग
तुम्हारे पास आने से भी डरेंगे I"
यह सुनकर में बहुत डर  गया और  रोने  लगा I
मैंने उससे  कहा-" तुमने तो मुझे कैद कर ही लिया हैं, पर मुझे छिपकली तो
मत बनाओ  I"
अगर मैं तुमको छिपकली नहीं बनाऊँगी तो मेरे महल की पहरेदारी कौन करेगा?
पर मैं तो बहुत दयालु हूँ ना , इसलिए तुम्हारी मदद करते हुए तुम्हें बता
रही हूँ कि अगर कभी किसी ने तुम्हें किशमिश खिला दी तो तुम अपने असली रूप
में आ जाओगे और मेरा आधा जादू खत्म हो जाएगा I
सुलतान यह सुनकर बहुत दुखी हो गया और बोला-" हमें तुम यह बताओ कि हुस्ना
कहाँ मिलेगी ?"
 " तुम इस दरवाज़े से अंदर चले जाओ, वह इस समय महल के अंदर ही हैं I "
राजकुमार ने जवाब दिया सुलतान ने यह सुनकर सबको अपने पीछे आने का इशारा
किया और राजकुमार के बताए हुए दरवाज़े से अंदर चला गया I
दरवाज़े  के अंदर  जाते ही सबकी   आँखें   आश्चर्य  से फ़ैल  गई सामने
हवा  में  बहुत  सारी    मछलियाँ  उड़  रही थी और हुस्ना  जादूगरनी
उन्हें  हवा   में से ही पकड़ -पकड़ कर एक के बाद  एक कच्चा ही  खा  रही थी
I सबको   यह देखकर  बहुत  घिन  आई  पर भूरी के मुहँ में पानी  आ गया पल
भर  को वो जैसे  सब  कुछ  भूल  गई और उसने  पूरी  ताकत  से छलाँग  लगाईं
और हुस्ना के मुहँ में  जाती  हुई मछली   को पकड़ने  के लिए   लपकी
जिससे   हुस्ना  हड़बड़ाकर  गिर  पड़ी I
भूरि ने तुरंत मछली  खा  ली पर जैसे  ही उसने हुस्ना  को देखा वो डर   के
मारे  थर  थर  काँपने  लगी और बोली -" मुझे माफ़  कर दो सुलेमान मुझसे
बहुत  बड़ी  भूल  हो गई
 नहीं-नहीं भूरी, तुम जानती ही नहीं कि आज तुमने क्या कमाल कर दिखाया
भूरी ने हुस्ना की ओर  देखा जो ज़मीन पर गिरी पड़ी थी और उसके कंधे के पास
कटोरा  पड़ा हुआ था भूरि लपक कर गई और मुँह  में उठाकर  जादुई छड़ी पकड़ ली
और जाकर सुलेमान को दे दी
हुस्ना गुस्से से चीखी-" मेरी छड़ी मुझे तुरंत वापस कर दो हाँ जरूर वापस
करेंगे ये लो अपनी छड़ी कहते हुए सुलेमान ने वो कटोरा हाथों से दो टुकड़ों
में कर दिया  और हुस्ना  की तरफ उछाल दिया I
कटोरे के टूटते ही हुस्न जोर से चीखी और धुआँ बनकर आसमान की ओर उड़ने लगी I
धुएँ में से आवाज़ आ रही थी-" कटोरा जोड़ दो तो मैं कभी किसी को परेशान नहीं करुँगी
सुलतान यह सुनकर बोला-" नहीं, नहीं अब तुम बादलों के पास जाकर आराम से रहो I "
और देखते ही देखते हुस्ना बादलों धीरे धीरे आसमान मैं जाकर विलीन हो गई I
उसके जाते ही वहां एक जोरदार धमाका हुआ और उसका सारा तिलिस्म टूट गया I
चारों तरफ जितने भी मूर्ति बने आदमी और जानवर थे सब जीवित हो गए और ख़ुशी
के मारे नाचने लगे I
सभी ने वहां आकर ख़ुशी के मारे सुलतान और सुलेमान को गोद में उठा लिया I
सुलेमान हँसता हुआ बोला-" अरे , अब मुझे नीचे तो उतारो I " यह सुनकर सभी
लोगो ने तुरंत उसे नीचे उतरा I
सुलेमान इधर उधर देखते हुए बोला-" पर हर्ष तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा,
जिसे  हम सब ढूंढने आये हैं , तभी एक कोने में बिखरे बाल और फटे से कपड़े
पहने उन्हें एक युवक दिखाई दिया जिसके पैरों में जंजीरे पड़ी हुई थी I
सुलतान उसे देखकर चौंका और फिर दौड़कर उसके गले लग गया I वो युवक हड़बड़ा
गया और उसने पूछा-" तुम कौन हो ?"
सुलतान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया -" मैं तुम्हारे सबसे अच्छे दोस्त
चाँद का दोस्त हूँ I
उसी ने मुझे यहाँ तुम्हें छुड़ाने के लिए भेजा हैं I"
पर तुम तो बिलकुल मेरे जैसे दिखते   हो..हर्ष सुलतान को देखते हुए बोला
तभी भूरि बोली-" अरे , सुलतान तुम कितनी बाते करते हो अब उसके पैर की
जंजीरे तो खोलो जरा
भूरी ने इतना बोलते ही हर्ष की पैरों की ज़ंजीर अपने आप खुल गई और देखते
ही देखते वहाँ पर हुस्ना का जादू खत्म होने लगा I
सुलतान बोला-" अब हमें चलना चाहिए तुम और पत्थर चाँद के पास जाओ वो बड़ी
ही बेसब्री से तुम्हारी राह देख रहा होगा I
हर्ष कुछ बोलता इससे पहले ही पत्थर बोला-" नहीं, तुम सबको भी हमारे साथ
चलना पड़ेगा , वरना मैं भी वापस नहीं जाऊँगा I "
उसका प्यार देखकर सुलतान के साथ साथ सभी की आँखें भर आई, पर सुलतान अपने
आँसूं छुपाते हुआ पत्थर से बड़े ही प्यार से बोला-" तुम तो जानते ही हो की
हर्ष जैसे अभी और भी कई राजा हैं जो बहुत मुसीबतों में हैं और उन्हें
सिर्फ़ मैं ही छुड़ा सकता हूँ I
सुलेमान भी पत्थर के ऊपर बड़े प्यार से हाथ रखते हुए बोला-" और हम उन्हें
छुड़ाने में जितनी देर करेंगे वे सब और मुसीबतों में पड़ जाएंगे I
हर्ष जो अब तक चुपचाप खड़े उन सबकी बात सुन रहा था आगे आकर बोला-अब तुम
मेरे साथ मेरे महल में चलो I सुलतान ने उसका हाथ बड़े ही प्यार  से पकड़ते
हुए कहा-" मुझे  अभी अपने और पांच हमशक्लों को कैद से मुक्त कराना  हैं
I
वे सब भी बड़ी बेसब्री से मेरी राह देख रहे होंगें  I
हर्ष बोला-" पर  तुम मुझसे वादा  करो कि उन सबको छुड़ाने के बाद तुम मुझसे
जरूर मिलोगे I "
मेरे दोस्त मैं भी तुमसे मिलने  के लिए उतना ही बेक़रार रहूँगा जितने तुम हो I
क्यों नहीं, जरूर..मुझे तो नरम मुलायम बादलों में चलने के बाद अब जमीन पर
पैर रखने का भी मन नहीं होता..भूरी इतराते हुए बोली
उसकी बात सुनकर सभी जोरो से हँस पड़े
सुलतान ने माहौल को हल्का करने के लिया भूरी को चिढ़ाते हुए कहा-" तुम्हें
ज़मीन के बारे में कहाँ पता होगा, तुम वैसी भी तो किसी ना किसी के कन्धों
पर ही चढ़ी रहती हो
यह सुनकर सभी जोरो से हँस पड़े I
सुलतान बाँसुरी से बोला-" इन दोनों को जल्दी से इनके दोस्त चाँद के पास
पहुँचा दो I "
क्यों नहीं अभी लो..और देखते ही देखते हर्ष और पत्थर गायब हो गए I
भूरी बोली-" चाँद कितना खुश होगा ना अपने दोस्त से इतने समय बाद मिलकर
सुलतान ने भूरी के सर पर हाथ फेरते हुए कहा-" सबसे ज्यादा खुश तो मैं हूँ
कि आज दो दोस्तों को मिलवा सका I
तभी वहाँ राजकुमार और जिन्न आते दिखाई दिए
अरे, यह तो वही जिन्न हैं ना जो जमीन के अंदर गढ़ा हुआ था I
जिन्न तब तक उन सबके पास आ चूका था I
वह मुस्कुराते हुए बोला-" हुस्न के यहाँ से जाते ही उसका जादू खत्म हो
गया और मैं भी उसके चंगुल से आज़ाद हो गया I
राजकुमार सुलतान का हाथ पकड़ते हुए बोला-" मुझे समझ में नहीं आ रहा हैं कि
मैं तुम्हें कैसे शुक्रिया कहूँ   I
सुलतान ने उसे गले लगाते हुए कहा - " तुम आज़ाद हो गए इससे बढ़कर हमारे लिए
और कोई ख़ुशी कि बात नहीं हैं  I "
अब हम तुम्हें भी तुम्हारे सैनिकों और साथियों सहित तुम्हारे राज्य में
पहुँचा देते हैं  ..सुलतान ने राजकुमार से कहा
ठीक  हैं...पर तुम लोग आना जरूर ,राजकुमार ने अपनी भीगी पलकें  पोंछते हुए कहा
हाँ, हम सब आएँगे....
सुलेमान ने भूरी को गोद   में लेते   हुए कहा
और फिर सुलतान ने बाँसुरी की मदद से  राजकुमार ओर उसके साथियों को को उसके
महल पहुंचा  दिया I
पर मैं तो तुम लोगो के साथ ही चलूँगा ..जिन्न बोला
हमारे साथ..पीलू चौंकता हुआ बोला
हाँ, तुम्हारे साथ..अब मैं भला यहाँ अकेले रहकर क्या करूँगा ..मेरे सारे
संगी साथियों को तो हुस्ना ने खत्म कर दिया था I अब मेरा इस संसार में
कोई भी नहीं है I "
भूरी यह सुनकर जिन्न के कंधे पर कूदकर बैठ गई और बोली-" हाँ, अब से तुम
हमारे ही साथ रहना I
हैं ना सुलेमान..भूरी ने सुलेमान की तरफ़ देखते हुए पूछा
बिलकुल, क्यों नहीं...सुलेमान ने हामी  भरते  हुए कहा
चलो, अब हमें यहाँ से चलना  चाहिए , वरना  बहुत  अँधेरा हो जाएगा
हाँ, चलो, सुलतान ने सुलेमान की बात का समर्थन करते  हुए कहा
और फिर  वे  सभी लोग आसमान में उड़ चले I
जब वे एक घने जंगल से गुज़र रहे थे तो सुलतान बोला-" यह बिलकुल वैसा ही
जंगल हैं जैसा मुझे सपने में दिखा था और इस बार हमें जुड़वाँ भाई मिलेंगे
I "
यह सुनकर भूरी जोरो से हँस पड़ी और बोली- अभी तक तो हम सुलतान के सामने एक
सुलतान देखते थे और अब हम दो दो सुलतान देखेंगे I "
भूरी की बात सुनकर सुलेमान ने हँसते हुए पूछा -" पर हमें वे दोनों मिलेंगे कहाँ?"
अब तक जैसे हमें सब अपने आप मिलते चले गए हैं वैसे ही ये भी मिल
जाएंगे..पीलू ने जवाब दिया अभी वे दोनों ये बात कर ही रहे थे कि अचानक
झाड़ियों के पीछे से उन्हें कुछ आवाज़ें सुनाई दी I" सुलतान और उसके दोस्त
दबे पाँव झाड़ियों के पास पहुँचे ताकि उनके क़दमों की आहट किसी  को सुनाई
ना दे और वहाँ पहुँचकर उन्होंने जो दृश्य देखा तो डर के मारे उन सभी की
चीखे निकल गई I उन्होंने देखा कि वहाँ पर जो आदमी बैठे थे वो एक एक करके
सांप बनने लगे और झाड़ियों में ही सरपट भागते हुए गायब हो गए I
ये देखकर भूरी ने तो डरकर मारे अपने पंजे अपनी आँखों पर रख लिए और आँख
बंद किये ही बोली-" सुलेमान यहाँ से चलो कहीं हम सब भी साँप न बन जाए I "
तभी सुलतान ने देखा , चांदी की तरह चमचमाते हुए  बहुत ही खूबसूरत दो सफ़ेद
सांप  कहीं से निकलकर आए   और एक पत्थर के ऊपर अपना बड़ा सा फ़न  काढ़कर बैठ
गए
सुलेमान बोला-" अब हमें यहाँ से भाग जाना चाहिए I
पीलू घबराते हुए बोला-" हां, देखो तो जरा ये साँप तो हमारी  ही लगातार
देख रहे  हैं I यह सुनकर वे सब जैसी ही वहाँ से भागने को हुए तभी वे
दोनों साँप सुलतान के हमशक्ल बन कर खड़े हो गए
रुको सुलतान..उनमें से एक बोला
सुलतान अपना नाम सुनकर चौंका  फिर धीरे से बोला-" कौन हो तुम दोनों?"
हम दोनों भाई है ज़माम ओर ज़िदान..हमें एक सँपेरें  ने साँप बनाकर कैद कर लिया है I
सुलतान ने उत्सुकता से पूछा - "पर उसने तुम दोनों को पर यहाँ कैद क्यों किया "
ज़माम  बोला-"  दस वर्ष पहले जब हम दोनों  बाग़ में  खेल रहे थे तो अचानक
अनजाने में हमारा  पैर एक बहुत बड़े हरे सांप पर पड़  गया जिसे हम दोनों
में से कोई भी उसे  घास के बीच में होने के  कारण देख नहीं पाया I
घायल साँप तो उस वक़्त सरपट दौड़ता हुआ भाग गया पर उसके थोड़ी ही देर बाद
वहाँ पर अचानक करीब दो फ़ीट का आदमी हमारे  सामने आया और गुस्से से बोला-"
अभी तो तुम दोनों केवल एक साँप के ऊपर पैर रखा है पर तुम दोनों राजकुमार
हो कल को अगर तुम राजा बन गए तो बहुत ही अत्याचारी  और तानाशाह राजा
बनोगे I
मैं उसकी बात सुनकर बहुत डर गया और बोला-" हरी घास में उस हरे साँप के
होने की वजह से हम उसे देख नहीं सके थे I
वो आदमी इस पर इतनी जोर से चिल्लाया कि मुझे लगा मेरे कान के परदे फट
जाएंगे और हम दोनों ने घबराकर अपने कानों पर हाथ रख लिए I पर वो चीख चीख
कर कह रहा था-" वो हमारे नाग लोक के राजा थे अब तुम्हें इस गलती का दण्ड
तो भुगतना ही पड़ेगा और जब तक हम दोनों उससे कुछ कहें अचानक एक धूल
भरी आंधी उड़ी और हमने घबराकर अपनी आँखें बंद कर ली I
जब हमारी आँखें खुली तो हमने खुद को इस नाग लोक में पाया ...कहते हुए
ज़िदान के आँसूं छलछला उठे I
सुलतान ने देखा कि ज़माम भी अपने आँसूं पोंछ रहा सुलतान ने दुखी होते हुए
कहा -" अनजाने में की गई गलती की वजह से क्या किसी को पूरी ज़िंदगी बंदी
बना लिया जाएगा ?"
सुलतान जिदान के पास पहुंचा और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला-" हमें अब ये
बताओ कि तुम आज़ाद कैसे निकल सकते हो ?"
कल नागपंचमी हैं और वो यहाँ पर उस मणि के पूजा करने आएगा अगर उसे कल ही
नदी में दाल  दिया जाए तो उसका अंत हो जाएगा
भूरी , जो कि सुलेमान के कंधे पर चढ़ी बैठी थी बोली-" इसीलिए यहाँ कितनी
धूम मची हुई हैं सुलतान के साथ सभी का ध्यान अब उस जगह की ओर गया जहाँ पर
एक बहुत बड़ी कांच की मणि रखी हुई थी और जिसमें से सतरंगी रौशनी निकल रही
थी I
ओह..इस मणि  के कारण ही रात भी दिन लग रही हैं हाँ..यह तो सूरज से भी तेज
चमक रही हैं ..खीलू उसे एकटक देखते हुए बोला तभी वो सँपेरा  आदमी अपने इस
मणि की पूजा करने आता हैं..ताकि ये नागलोक सुरक्षित रहे उसने  इन तमाम
नागों को अपनी कैद में रखा हुआ हैं ताकि जब ये सांप लाखों वर्षों के हो
जाए और वे इसे एक बहुमूल्य मणि दे जिसकी शक्ति से ये सारे संसार को अपने
कब्ज़े में कर ले  I
कल की पूजा के बाद वो इस मणि को पाने में कामयाब हो जाएगा और फिर वो सबसे
शक्तिशाली इंसान बन जाएगा I सुलतान  बोला-" अब तो थोड़ी देर में सुबह
होने ही वाली हैं, हम यही उसका इंतज़ार करते हैं I पर अगर तुम्हें यहाँ
किसी ने देख लिया तो तुरंत बंदी बना लेंगे I
भूरी बोली-" सुलतान, जल्दी से हम सबको अदृश्य कर दो..
सुलतान ने बांसुरी से कहा-" हमें सँपेरा और नाग लोक का कोई भी व्यक्ति न
देख सके और पल भर के अंदर ही वे सब अदृश्य हो गए थोड़ी ही देर बाद वहाँ
चारों तरफ बहुत सारे आदमी  आ गए जिनके सर पर सोने के मुकुट थे और उन
मुकुटों में फन काढ़े सांपों की आकृति बनी हुई थी I
उन्हीं के बीच में एक बौना था जिसके ऊपर सब फूल फ़ेंक रहे थे I
अचानक सुलतान ने अपना छोटा सा रस्सी का टुकड़ा निकला और बोला-" यहाँ जितने
भी लोग हैं उन सबको इसमें बाँध दो और अचानक सारे आदमी और वह बौना रस्सी
में बंध  गए तभी सुलतान बोला-" मैं किसी भी नाग को कोई नुक्सान नहीं
पहुंचाऊंगा , बस मुझे इस सँपेरे को ही मारना हैं, जिसने तुम सबको यहाँ कई
सालों से कैद कर रखा हैं I
हम सब तुम्हारे साथ हैं, वे सभी एक साथ चिल्लाए .. नहीं , मुझे सिर्फ वो
मणि दे दो, फिर मैं खुद ही चला जाऊँगा..बौना चीखा नहीं ,
सुलतान रस्सी के टुकड़े से बोला-" इस बौने के अलावा सभी को आज़ाद कर दो और
बौने को बहुत दूर ले जाकर किसी गहरी नदी में फेंक दो ...
रस्सी आसमान में बौने को लेकर उड़ी  और हवा में ओझल हो गई.. कुछ ही पलों
बाद वहाँ धमाका हुआ और मणि ज़ोरदार आवाज़ के साथ फूट गई..और उसके साथ ही
संपेरे का काला जादू भी खत्म हो गया सब नाग सुलतान के पास आकर बोले-" अगर
कभी भी हमारी जरुरत हो तो हमें जरूर बुलाना..और यह कहते ही सब गायब हो गए
ज़माम और ज़िदान दौड़कर सुलतान के गले लग गए I
सुलतान बोला-" अब तुम दोनों अपनी आँखें बंद करो और कुछ ही देर बाद तुम
दोनों तुम्हारे राजमहल में अपने परिवार वालों के साथ होगे
ज़माम बोला-" हम तुमसे मिलने जरूर आएंगे सुलतान बोला-" हम हमेशा बहुत
अच्छे दोस्त बनकर रहेंगे ..
और यह कहते हुए सुलतान ने बाँसुरी से कहा-" इन दोनों को इनके घर पहुंचा
दो बांसुरी बोली- अभी लीजिए और वहाँ से ज़माम  और ज़िदान  के जाते ही भूरी
बोली-" मेरा तो आराम करने का मन कर रहा हैं I
सुलेमान बोला-" नहीं, अभी हमें जल्दी से सुलतान के बाकी हमशक्लों को
ढूँढना हैं I पीलू बोला-" अरे ,वो देखो आसमान में कितने सारे चमकीले
गुब्बारे उड़े जा रहे हैं I तभी उनमें से एक गुब्बारा धीरे से उतरते हुए
सुलेमान और उसके दोस्तों के इर्द गिर्द आकर रूक गया I भूरी ने डरकर अपनी
आखों पर हाथ रख लिए और बोली-" जल्दी से यहाँ से भागो I " मेरी बात तो
सुनो कहता हुआ वो चमकीला गुब्बारा बोला-" सुलतान, मेरी मदद करो I "
भूरि डर कर चीखी-" अरे, अब तो गुब्बारे भी बोलने लगे हैं I सुलेमान ने
पूछा-" हमने कभी किसी गुब्बारे को बोलते नहीं सुना..सच सच बताओ कौन हो
तुम ?"
मैं तुम्हारा हमशक्ल हूँ वकार गुब्बारे ने जवाब दिया हाहाहा..भूरी जोरो
से हँसते हुए बोली..हमें  तो पर सुलतान गुब्बारे जैसा नहीं दिखता
गुब्बारा बोला-" जल्दी से मेरे पीछे आओ..क्योंकि मैं गलती से एक दिन
गुब्बारों के देश चला गया था और तभी से ये गुब्बारे मुझे जाने नहीं दे
रहे
ओह..सभी के मुँह से अचानक एक साथ निकला तो क्या ये तुम्हें तंग करते
हैं..पीलू ने दुःख से पूछा नहीं, पर मेरी हालत तो देखो, मैं गुब्बारा
बनकर यहाँ वहां उड़ता रहता हूँ..मेरी मदद करो और मुझे पहले जैसा बना दो..
ठीक हैं अब तुम चलो, हम तुम्हारे साथ चलते हैं
सुलतान और उसके दोस्त गुब्बारों के पीछे - पीछे आसमान तक उड़ते हुए जाते
हैं कि तभी उन्हीं गुब्बारों में से एक कहता  हैं-" हम तुम्हारे दोस्त को
वापस नहीं  देंगे क्योंकि हम सभी उससे बहुत प्यार करते हैं I "
सुलतान बोला-" पर वो तुम लोगो के साथ नहीं रहना चाहता और किसी को
जबरदस्ती बंदी बनाकर रखना बहुत बुरी बात हैं I
ये सुनकर लाल गुब्बारा कुछ सोचता हुआ बोला-" हम सभी अब गुलाबी रंग के बन
जाएंगे अगर तुमने अपने दोस्त को पहचान लिया तो तुम उसे ले जा सकते हो I"
और फिर सभी गुबारें अपना रंग बदलने लगे और एक के बाद एक गुलाबी होने लगे I
सुलतान के माथे पर घबराहट के मारे पसीना आ गया तभी उसके पास एक गुब्बारा
उड़ता हुआ गया और फुसफुसाकर बोला-" जब तुम मेरी तरफ देखोगे तो मैं थोड़ा सा
हिलूंगा I"
और यह कहते हुए वह गुब्बारा वहाँ से चला गया I
सुलतान का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा और वो उस तरफ देखने लगा जहाँ पर ढेर
सारे गुलाबी गुब्बारें इकठ्ठा हो रहे थे I
तभी उन में से एक गुब्बारा धीरे से हिला और यह देखकर सुलतान ने तुरंत उस
और इशारा करते हुए कहा-" वकार.. ये सुनते ही वकार अपने असली रूप में आ
गया तभी एक नन्हा सा गुलाबी गुब्बारा सुलतान के पास आकर बोला-" वकार के
माथे की मणि रात में बहुत जगमगाती हैं , और जिसके कारण हमें अँधेरे में
डर नहीं लगता I
यह सुनकर दूसरा गुब्बारा बोला-" पर अब तो हम शर्त हार गए इसलिए हम लोग
अँधेरे में रह लेंगे I " नहीं..नहीं..हम तुम सबको बिलकुल अँधेरे में नहीं
रहने देंगे..भूरी सुलतान के कंधे पर बैठे बैठे ही बोली सुलतान ने सुलेमान
की तरफ मुस्कुराकर देखा और सुलेमान ने तुरंत अपनी जेब से जादुई कांच का
टुकड़ा निकाल कर हवा में उछाला और पल भर में ही वो टुकड़ा जगमगाता हुआ पहाड़
बन गया, जिसकी रौशनी से ऐसा लग रहा था मानो वहाँ हज़ारों सूरज एक साथ निकल
आए हो I
गुब्बारें ख़ुशी के मारे नाचने लगे और सुलतान  से बोले-" तुम बहुत नेक और
अच्छे हो हम तुमसे मिलने जरूर आएंगे, बस एक बार हमें आवाज़ दे देना सुलतान
ने कहा -" हम सब तुम्हें हमेशा याद रखेंगे I "
गुब्बारा बोला-" वकार, हम से मिलने जरूर आना I "
वक़ार ने हँसते हुए कहा-" मुझे जब भी उड़ने का मन करेगा मैं यहाँ पहुँच जाऊँगा I"
उसकी बात सुनकर सब हँसने लगे I
वकार सुलतान से बोला-" अब मैं जाता हूँ पर तुम सबसे मिलने जरूर आऊंगा I "
और यह कहते ही वहां सफ़ेद धुंआँ  सा उठा और वकार गायब हो गया ये देखकर
भूरी बोली-" लगता हैं इसके अंकल  भी हमारे खलील अंकल जैसे जादूगर हैं..ये
सुनकर सभी जोरो से हंस दिए और वहां से चल दिए
सुलतान बोला-" अब मेरा हमशक्ल हमें यहीं कहीं मिलना चाहिए ..क्योंकि ऐसे
ही पहाड़ और जंगल मैंने सपने में देखे थे
पीलू  ने कहा-" तब तो हमें इसी जगह पर रूककर  आपके हमशक्ल को देखना चाहिए
सुलतान पीलू  की बात से सहमत होते हुए वही रूक गया और पीलू, खीलू  और
भूरी इधर उधर देखने लगे तभी वहाँ  पर अचानक सुलतान को एक लम्बी दादी वाला
आदमी एक चोगा पहने आता दिखाई दिया I


उसके हाथों में एक बड़ा सा शीशा था जिस पर सूरज की किरणें पड़ने से सबकी
आँखें चुंधिया रही थी I जब वो पास आया तो उसने शीशा उसकी तरफ कर लिया और
बोला-" जाओ यहाँ से ये मेरी ज़मीन  हैं I भूरी बोली-" मैंने बहुत दिनों से
अपनी शक्ल आईने में नहीं देखी जरा एक बार देख लेने दो I "
नहीं, सब लोग भागो यहाँ से..वो आदमी गुस्से से चिल्लाया
सुलेमान ने सुलतान से कहा-" ये हमें देखकर इतना गुस्सा क्यों हो रहा हैं ?"
सुलतान ने पीलू की ओर इशारा किया ओर पीलू ने उछलकर एक ही झटके में आईना
अपने हाथ में ले लिया
जब उन्होंने उसमें देखा तो सब आश्चर्यचकित रह गए आईने के अंदर सुलतान का
हमशक्ल कैद था जो जोर जोर से आईने से बाहर आने के लिए आईने पर जोर जोर से
मुक्के  मार रहा था I
वो आदमी चीखा -" मेरा आईना मुझे दे दो ....
क्यों नहीं कहते हुए सुलतान ने आईना जमीन पर जोरो से पटक दिया ओर आईने के
टूटते ही सुलतान का हमशक्ल बाहर खड़ा था I
सुलेमान बोला-" अब तुम बिलकुल आज़ाद हो दोस्त ओर इसे हम ऊपर आसमान की सैर
करने के लिए भेज देते हैं जहाँ से ये कभी वापस नहीं आएगा I
खीलू बोला-" ये काम तो मैं ही करूँगा और ये कहते हुए उस आदमी को उठाया और
घुमाते हुए ऊपर की तरफ फेंक दिया I
वो आदमी बचाओ बचाओ चिल्लाता रहा फिर बादलों के बीच में ना  जाने कहाँ गुम हो गया I
वे जैसे ही थोड़ा सा आगे बढ़े, वहाँ पर बहुत सारे कबूतर थे I सुलतान ने
देखा कि एक सफ़ेद रंग का कबूतर उसके कंधे पर आ कर बैठ गया और कुछ बोलने
लगा I सुलतान ने उसे हाथ अपने में उठा लिया और प्यार से उसके ऊपर अपना
हाथ फेरने लगा I
तभी वो कबूतर बोला-" सुलतान ,मैं  ही तुम्हारा आखिरी  हमशक्ल हूँ  जिसकी
तलाश में तुम भटक रहे हो
ये सुनकर सुलतान और उसके सभी साथ आश्चर्यचकित हो गए I
भूरी बोली-" पर तुम कबूतर कैसे बन गए I.
मेरी ही गलती की वजह से मेरे सभी साथी कबूतर बन गए है I तुम मुझे मेरे
असली रूप में लाओ या न लाओ पर मेरे साथियों को फिर से पहले जैसा ही कर दो
I "
ये सुनकर सुलेमान कबूतर से बोला-" तुम बहुत अच्छे हो I तुम्हें खुद से
ज़्यादा दूसरों की चिंता है I पर ये तो बताओ कि तुम सब कबूतर बने कैसे?"
वो सामने तुम एक पहाड़ी देख रहे हो ना ..
हाँ, हाँ..ऐसा लग रहा है जैसे वो कोई बहुत बड़ा कछुआ हो I भूरी आँखें
मटकाते हुए बोली
कबूतर ने जवाब दिया-" वो कछुआ ही है , पर मेरी गलती से पत्थर का बन गया I
ये सुनकर भूरी हमेशा की तरह डर के मारे सुलेमान के कंधे पर जा बैठी I
कबूतर आगे बोला-" मुझे जादू सीखने का बड़ा शौक था I इसलिए इतने बड़े कछुए
को देखकर मेरे मन में  उसे पत्थर का बनाने का विचार आया पर लगता है की
मैंने कुछ गलत मन्त्र पढ़ दिए जिससे वो भी अपने असली रूप में  नहीं आया और
हम सब भी कबूतर बन गए I
सुलतान ने ये सुनकर अपने साथियों को अपने साथ आने का इशारा किया और उस
कछुए के पास पहुंचा I
कछुए के पैर में  घाव था और वो इन सबको देख रहा था I
सुलतान ने ये सुनकर अपने साथियों को अपने साथ आने का इशारा किया और उस
कछुए के पास पहुंचा I
भूरी सुलेमान से बोली- तुम्हारे पास वो बोतल हैं ना,
कौन सी    ..सुलतान ने आश्चर्य से पूछा
 खलील अंकल ने कांच की बोतल दी थी जिसमें जादुई पानी हैं, जिसे छिड़कने पर
कोई भी पत्थर से वापस अपने असली रूप में आ जाएगा I
हाँ..हैं ना..कहते हुए सुलेमान ने वो बोतल सुलतान को पकड़ा दी और सुलतान
ने उसका जल कछुए  पर छिड़क दिया I
पल भर में ही वो कछुआ ज़िंदा हो गया और कबूतर बना सुलतान का हमशक्ल रिज़वान
अपने साथियों के साथ में असली रूप में आ गया I
 ख़ुशी के मारे रिज़वान सुलतान के गले लिपट गया और बोला-" अब तुम मेरे साथ
चलकर कुछ दिन रहो सुलतान I
सुलतान हँसता हुआ बोला-" अब तुम मेरे महल में आकर रहोगे I
मैं तुम्हें अपने सभी दोस्तों और हमारे हमशक्लों से मिलवाऊंगा भी  ...
हमारे हमशक्ल..कहते हुए रिज़वान ठहाका मारकर हंस पड़ा  और फिर रिज़वान से
विदा लेकर सुलतान अपने साथियों के साथ अपने महल पहुँच गया I
महल में जाकर सभी बहुत खुश थे I
सुलतान सुलेमान से बोला-" अगर तुम ना होते तो शायद में अपना सपना कभी
पूरा नहीं कर पाता I तभी भूरी कूदकर सुलतान के कंधे पर बैठ गई और बोली -"
अगर मैं नहीं होती तो तो तुम दोनों कुछ नहीं कर पाते
पीलू खीलू की तरफ देखते हुए बोला-" और हमने तो कुछ किया ही नहीं सुलतान
ने बड़े प्यार से खीलू और पीलू के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा-" तुम  सबने
मिलकर दोस्ती और प्यार के लिए मेरा सपना पूरा किया है I
ये सुनकर सुलेमान बोला-" अब हमें जल्दी से अपने सभी दोस्तों को आमंत्रित
करना चाहिए ताकि हम सब महल में जश्न मना  सके I
बिलकुल...कहते हुए सुलेमान खुश हो गया
आज सुलतान के राजमहल  में जश्न का महल था I
सुलतान के सभी हमशक्ल अब आ चुके थे और सब तरफ हंसी ख़ुशी का माहौल  था I
सुलतान बोला-" अगर हम सभी को अपने नाम ना पता हो, तो कोई हम में अंतर बता
ही नहीं सकता I ये सुनकर हर्ष हँस पड़ा और बोला-" चाँद भी यही कह रहा है I
चाँद ये बात सुनकर बोला-" अब मैं और मेरा दोस्त पत्थर नाच दिखाएँगे I
ये सुनकर भूरी बोली-" haan ..पत्थर तो बहुत अच्छा नाचता है ..मैं भी डांस
करुँगी और ये कहते हुए भूरी , पत्थर और चाँद ने सबको डांस दिखाया I
तभी अंकल खलील आते दिखे I
सभी उन्हें देखकर बहुत खुश हुए..भूरी तो उड़तीं  हुई जाकर उनके कंधे पर  बैठ गई I
अंकल खलील ने उसे प्यार करते हुए कहा-" मुझे तुम्हारी बहुत याद आई भूरी
.. मैं तो अब आपके साथ ही चलूँगी वापस..
भूरी अंकल के कंधे पर ही बैठे बैठे बोली तभी ज़माम और जिदान आगे आकर
बोले-" सुलतान,सुलेमान भूरी ,पीलू और खीलू के कारण ही आज हम सब यहाँ आपके
सामने है
 भूरी तुरंत बोली-" मैं तो हूँ ही बहुत अच्छी
ये सुनकर सब जोरो से हँस पड़े तभी सिकंदर बोला-" भूरी, मैं अपनी फूलों की
घाटी से तुम्हारे लिए ढेर सारे गुलाब लेकर आया हूँ I "
थैंक्यू सिकंदर..अब तो मैं तुम्हारे कंधे पर भी बैठूंगी तभी अंकल खलील
बोले-" अब यहाँ पर मैं भूरी को उसका मनपसंद उपहार दूंगा...
 क्या क्या..जल्दी बताओ .. सुलतान बोला-" भूरी, अगर तुम अंकल को बोलने
नहीं dogi .तो तुम्हारा गिफ्ट कैंसल हो जाएगा
ये सुनकर भूरी ने तुरंत अपने मुँह पर पंजा रख लिया और चुप हो गई
सुलतान सहित सभी लोग भूरी की मासूमियत देखकर हँस पड़े तभी अंकल खलील ने
हवा मैं अपना हाथ लहराया और वहाँ पर एक पेड़ आ गया I
पर उस पेड़ के हरे भरे पत्तियों के बीच ढेर सारी रंगबिरंगी टॉफी और चॉकलेट
लटक रही थी
आहा... सबके मुँह से आश्चर्यमिश्रित ख़ुशी के साथ निकला
भूरी ख़ुशी से चहकते हुए बोली-" तो क्या आपको मेरा ये बर्थडे गिफ्ट याद था ?"
अंकल खलील ने मुस्कुराते हुए बड़े ही प्यार से भूरी को चूम लिया सभी लोग
वहाँ पर खुश होकर ताली बजाने लगे I
चाँद  बोला-" भूरी, चलो मेरे साथ.तुम्हें बादलों पर चलना बहुत अच्छा लगता है ना
हां..मैं जरूर आउंगी..पर अभी मै अपने अंकल खलील के साथ जाउंगी..
 सुलेमान बोला-" पर भूरी, मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा..
ये सुनकर भूरी बोली-" सुलेमान, तुम भूल गए कि मुझे उड़ना भी  आता है, मैं
रोज तुमसे ,सुलतान से और पीलू खीलू से मिलने यहाँ आया करुँगी.
तभी भूरी बोली-" अरे  , हम सब बातों बातों में मेरे चॉकलेट पेड़ की
चॉकलेट खाना  ही भूल गए.. अंकल ख़लील  बोले-" हाँ..हम सब मिलकर भूरी के
साथ उसका बर्थडे  गिफ़्ट  एन्जॉय   करते है I और फिर सब हंसी ख़ुशी उस पेड़
से चॉकलेट तोड़  कर खाते   है और एक दूसरे  को खिलाते  हुए वहाँ की पार्टी
 का मज़ा  लेते  हुए हँसते  खिलखिलाते  हुए नाचते  गाते  है......

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